फिनटेक यूनीकॉर्न भारतपे (BharatPe) अब ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर (PA) के तौर पर काम कर सकेगी। इसके लिए उसे केंद्रीय बैंक RBI से मंजूरी मिल चुकी है। यह मंजूरी भारतपे की 100 फीसदी हिस्सेदारी वाली सब्सिडियरी रीसाइलेंट पेमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (Resilient Payments Private Limited) को मिली है। इससे पहले पिछले साल दिसंबर में डिजिटल पेमेंट प्रोसेसिंग फर्म वर्ल्डलाइन ईपेमेंट्स इंडिया (Worldline ePayments India) और फिनटेक स्टार्टअप पेशार्प (Paysharp) को भी पेमेंट एग्रीगेटर के लिए आरबीआई से इन-प्रिंसिपल ऑथराइजेशन मिला था। पिछले कुछ महीने में ओपन (Open), इंफीबीम (Infibeam) और कैशफ्री (Cashfree) जैसी कुछ और फिनटेक कंपनियों को भी इसका लाइसेंस मिल चुका है।
RBI से BharatPe को फिर लेनी होगी मंजूरी
भारतपे के अंतरिम सीईओ और मुख्य वित्तीय अधिकारी नलिन नेगी के मुताबिक आरबीआई से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी की विस्तार योजना को मजबूती मिलेगी। इससे अधिक से अधिक ऐसे आम लोगों, दुकानदारों तक पहुंच बढ़ेगी जिनके पास अभी बैंकिंग सिस्टम नहीं पहुंचा है। केंद्रीय बैंक से मंजूरी मिलने के बाद अब पेमेंट एग्रीगेटर की शर्तों को एक निर्धारित समय के भीतर पूरा कर भारतपे इसकी शुरुआत कर सकता है। हालांकि जरूरी कंडीशंस को पूरा करने के बाद केंद्रीय आरबीआई से फाइनल मंजूरी लेनी होगी, जिसके बाद यह ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर कारोबार शुरू कर सकता है।
पेमेंट एग्रीगेटर का क्या है मतलब
पेमेंट एग्रीगेट का काम दुकानदारों और ई-कॉमर्स साइट्स को पेमेंट सर्विसेज उपलब्ध कराना है। पेमेंट एग्रीगेटर ग्राहकों से पेमेंट स्वीकार करती है और फिर एक निश्चित समय के बाद दुकानदारों को ट्रांसफर कर देती है। यह ग्राहकों से सभी तरीके से पैसे ले सकती है और दुकानदारों को बैंक खाता खोलने की भी जरूरत नहीं होती है।
मार्च 2020 में आरबीआई ने नियम बना दिया कि पेमेंट एग्रीगेटर बनने के लिए उसकी मंजूरी लेनी होगी। जो गैर-बैंक कंपनियां यह सेवाएं पहले से दी रही थीं, उन्हें 30 जून 2021 तक मंजूरी के लिए आवेदन को कहा गया जिसे बाद में 30 सितंबर 2021 तक खिसका दिया गया। 185 से अधिक फिनटेक कंपनियों और स्टार्टअप्स ने पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। कुछ कंपनियों को केंद्रीय बैंक की सीधी निगरानी में कारोबार की मंजूरी मिल गई।