Slice के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं। इसकी वजह यह है कि उसका प्रीपेड कार्ड पार्टनर स्टेट बैंक ऑफ मॉरीशस इंडिया (SBM Bank India) तब तक नए कस्टमर नहीं बनाना चाहता, जब तक मौजूदा बिजनेस मॉडल के बारे में RBI की तरफ से स्थिति स्पष्ट नहीं कर दी जाती। स्लाइस एक फिनटेक यूनिकॉर्न है। टाइगर ग्लोबल ने इसमें निवेश किया है।
SBM Bank India ने इस बारे में Slice और Uni को बता दिया है। उसने कहा है कि डिजिटल लेंडिंग के लिए 10 अगस्त को पहली गाइडलाइंस को RBI का एप्रूवल मिल जाने के बाद वह नए कस्टमर बनाने पर रोक लगाने जा रहा है। SBM Bank India के इस फैसले के बाद उसके को-ब्रांडिंग पार्टनर्स स्लाइस और यूएनआई के पास भी नए प्रीपेड कार्ड पर रोक लगाने के सिवाय दूसरा कोई रास्ता नहीं होगा। हालांकि, स्लाइस यूनिफायड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी दूसरी सेवाओं के लिए नए यूजर्स बना सकेगी।
मनीकंट्रोल ने इस बारे में एसबीएम बैंक इंडिया से कुछ सवाल पूछे हैं। अभी सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। उधर, स्लाइस ने इस खबर के बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यूएनआई के प्रवक्ता ने पूछने पर बताया कि कंपनी ने 20 जून से नए कस्टमर्स बनाने बंद कर दिए हैं। तब RBI ने स्पष्टीकरण जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि PPI पर क्रेडिट लाइन की लोडिंग की मनाही है।
RBI की तरफ से एप्रूव की गई गाइडलाइंस में कहा गया है कि सभी तरह के लोन डिस्बर्सल और रिपेमेंट सिर्फ रेगुलेटेड एंटीटी के बैंक अकाउंट से होने चाहिए, जो कर्ज देता है और रिपेमेंट एक्सेप्ट करता है। ट्रांजेक्शन किसी पूल अकाउंट या थर्ड पार्टी के जरिए नहीं होना चाहिए।
इससे पहले मनीकंट्रोल ने खबर दी थी कि इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि प्रीपेड कार्ड्स और वैलेट जैसे प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) को आरबीआई के नियमों के मामले में अपवाद माना जाएगा। डिजिटल लेंडिंग पर वर्किंग ग्रुप ने अपनी सिफारिश में कहा था कि बॉरोअर्स जिनके पास सिर्फ पीपीआई अकाउंट्स है और कोई बैंक अकाउंट नहीं है, वे पूरी तरह से केवायसी कंप्लायंट पीपीआई को लोन डिस्बर्स कर सकते हैं।
हालांकि, इस बारे में आरबीआई के कुछ नहीं कहने के बाद बैंक कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। एक सूत्र ने बताया, "अगर RBI ने स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा है कि लोन पूरी तरह से केवायसी कंप्लायंट पीपीआई को डिस्बर्स किया जा सकता है तो हम यह नहीं मान सकते हैं कि ऐसा किया जा सकता है। इसलिए जब तक इस मसले पर स्थिति साफ नहीं हो जाती नए कस्टमर बनाने पर रोक लगा देना सुरक्षित होगा।"
SBM Bank India ने इस बारे में कुछ नहीं कहा है कि उन मौजूदा कस्टमर्स का क्या होगा जिन्हें उसके को-ब्रांडेड पीपीआई कार्ड्स के जरिए क्रेडिट लाइन या शॉर्ट टर्म लोन दिए जा रहे हैं। अगर पूरी तरह से कंप्लांयड पीपीआई को लोन डिस्बर्स करने के बारे में RBI की तरफ से स्पष्टीकरण नहीं आता है तो मौजूदा कस्टमर्स को भी लोन का डिस्बर्समेंट रोक देने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं होगा।