Startup Funding: कोरोना महामारी के बाद बहुत कुछ बदल चुका है। अब स्टार्टअप को भी फंडिंग मिलने में देरी हो रही है। कोरोना महामारी के दौरान जब कर्ज सस्ता था तो स्टार्टअप्स को बातचीत होने के दो से तीन हफ्ते में पैसे मिल जाते थे लेकिन 2023 में इसी काम में चार से पांच महीने लगे जा रहे हैं। हालांकि कुछ ऐसे भी हैं जो एक साल से लंबे समय से फंडिंग का इंतजार ही कर रहे हैं। जैसे कि वर्ष 2022 में बनी वेंचर कैपिटल (VC) फर्म स्फीतिकैप (SphitiCap) ने कुछ स्टार्टअप्स से डील की थी लेकिन 13 महीने बाद भी उन्हें पैसे मिले नहीं हैं।
किस-किस स्टार्टअप्स के साथ हुई है डील
स्फीतिकैप ने अक्टूबर 2022 में 50 करोड़ डॉलर का फंड लॉन्च किया था। इसने आठ डील के जरिए 5 करोड़ डॉलर (करीब 400 करोड़ रुपये) देने की भी बात कही थी। हालांकि अभी तक किसी डील के इसने पैसे नहीं दिए हैं। इससे भी बुरा तो ये है कि अभी इसे बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से रजिस्टर्ड फंड के तौर पर मंजूरी भी नहीं मिली है। यह जानकारी मनीकंट्रोल को सूत्रों के हवाले से मिली है।
इस वेंचर कैपिटल फर्म ने गरुणा एयरोस्पेस (Garuda Aerospace), पेवेद (PayVeda), एक फिनटेक स्टार्टअप, ईवी कंपनी कोरिट इलेक्ट्रिक (Corrit Electric) और एक चश्मा कंपनी क्लियरदेखो (ClearDekho) के साथ सौदे का सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया था। सॉफ्टवेयर-ऐज-अ-सर्विस कंपनी 6डिग्री से भी इसने फंडिंग का वादा किया था। लेकिन इन पांचों में से किसी स्टार्टअप को एक पैसा भी नहीं मिला है। इसके अलावा तीन और डील इसने की हैं जिसकी जानकारी नहीं मिली है।
ऐसे में स्टार्टअप के लिए दिक्कतें बढ़ गई हैं क्योंकि वे एक साल से भी लंबे समय से फंडिंग की बाट जोह रहे हैं। स्टार्टअप्स के फाउंडर्स का कहना है कि अगर पब्लिक अनाउंसमेंट नहीं हुआ होता तो इतनी दिक्कत न होती। कुछ ने तो यह आरोप भी लगाया कि स्फीतिकैप ने कंपनियों को डील के बारे में पब्लिक अनाउंसमेंट करने के लिए बाध्य किया था। वहीं स्फीतिकैप का कहना है कि यह म्युचुअल एग्रीमेंट के तहत हुआ है।
एक कंपनी का कहना है कि अगर स्फीतिकैप से फंड मिला होता तो वह ज्यादा तेज बढ़ रहे होते लेकिन नहीं मिला तो ग्रोथ कम से कम 40 फीसदी सुस्त हो गई। स्फीतिकैप के पोर्टफोलियो की कुछ कंपनियों को ब्रिज राउंड का रास्ता अपनाना पड़ा। जैसे कि गरुणा एयरोस्पेस ने पिछले महीने ऐलान किया था कि ब्रिज राउंड में 25 करोड़ रुपये जुटाए हैं। ब्रिज राउंडर ऐसा फाइनेंसिंग राउंड है जो फंड जुटाने के बड़े राउंड से पहले होता है।
SphitiCap का क्या कहना है इस पर
स्फीतिकैप के एमडी पल्लव कुमार सिंह ने मनीकंट्रोल से बातचीत में स्वीकार किया कि स्टार्टअप्स को अभी कोई पैसा नहीं भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इसके बारे में स्टार्टअप्स को बता दिया गया है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनके साथ हुई डील पूरी हो। कुछ डील इस महीने के आखिरी तक और कुछ इस वित्त वर्ष 2023-24 के आखिरी तक पूरी हो जाएगी। फंडिंग में देरी को लेकर पल्लव का कहना है कि अभी फर्म आंतरिक मामलों में लगी हुई है।