बिटकॉइन (Bitcoin) रूस की करेंसी रूबल (Rubble) से आगे निकल गया है। इसकी वजह भी यूक्रेन क्राइसिस (Ukraine crisis) है। क्राइसिस शुरू होने के बाद से बिटकॉइन में उछाल देखने को मिला है। दरअसल, बिटकॉइन का मार्केट कैपिटलाइजेशन रूस की करेंसी रूबल से ज्यादा हो गया है।
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से अमेरिका, यूरोपीय देश और जापान ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका असर रूबल पर पड़ा है। डॉलर के मुकाबले रूबल में तेज गिरावट देखने को मिली है। रूसी केंद्रीय बैंक ने इसे गिरने से बचाने के लिए कोशिश की है। लेकिन, रूस के केंद्रीय बैंक पर भी प्रतिबंध लगा है। इसलिए रूबल को गिरने से बचाने की उसकी क्षमता भी कम हो गई है।
फिएटमार्केटकैप के डेटा बताते हैं कि पहली बार ग्लोबल रैंकिंग में बिटकॉइन रूबल से आगे निकल गया है। मार्केट वैल्यू के लिहाज से बिटकॉइन 14वें पॉजिशन पर है, जबकि रूबल 17वें पायदान पर है। मई के बाद से बिटकॉइन में रूबल में होने वाली ट्रेडिंग सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई है। दरअसल, रूस और यूक्रेन में लड़ाई के चलते एक तरफ जहां रूबल में कमजोरी आई है वहीं बिटकॉइन में मजबूती आई है।
पिछले हफ्ते बिटकॉइन गिरकर 35,000 डॉलर पर आ गया था। उसके बाद से इसमें 20 फीसदी से ज्यादा तेजी आई है। बिटकॉइन दुनिया की सबसे बड़ी और पॉपुलर क्रिप्टोकरेंसी है। इसने पिछले कुछ सालों में इनवेस्टर्स को जबर्दस्त रिटर्न दिया है।
पिछले साल नवंबर में बिटकॉइन 69,000 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था। उधर, यूक्रेन पर रूस का हमला शुरू होने के बाद से रूबल करीब 30 फीसदी गिर चुका है।
रूस के केंद्रीय बैंक ने रूबल को गिरने से बचाने के लिए मुख्य इंट्रेस्ट रेट को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। इसके अलावा रूसी कंपनियों को विदेशी मुद्रा में अपनी 80 फीसदी इकम को डोमेस्टिक मार्केट में कनवर्ट करने के लिए कहा गया है। माना जा रहा है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों का रूस की इकोनॉमी पर असर दिखन लगा है। रूबल में आई बड़ी गिरावट इसका सबूत है।