ट्रेड वॉर नहीं रुका तो महंगाई और ब्याज दर बढ़ने का खतरा, WEF प्रमुख ने दी चेतावनी

WEF प्रमुख बोर्ज ब्रेंडे ने अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर पर चेताया, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरा है। टैरिफ बढ़ने से महंगाई और ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। यूरोप संतुलन की भूमिका में उभर सकता है।

अपडेटेड Apr 08, 2025 पर 8:24 PM
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ब्रेंडे ने चेतावनी दी कि अगर टैरिफ वॉर नहीं रुकता, तो इसकी कीमत अमेरिका को भी चुकानी होगी।

Rising Bharat Summit 2025: वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (WEF) के प्रेसिडेंट और CEO बोर्ज ब्रेंडे (Børge Brende) ने आगाह किया कि अगर अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

उन्होंने Rising Bharat Summit 2025 में बोलते हुए कहा कि अमेरिका अपने औसतन 3% टैरिफ को बढ़ाकर 'मिड 20%' तक ले जाने की योजना बना रहा है। ये बदलाव अगर हुआ, तो अमेरिका औद्योगिक देशों में सबसे अधिक आयात शुल्क लगाने वाला देश बन जाएगा। ब्रेंडे ने इसे 'बड़े नीति-परिवर्तन की शुरुआत' बताया।

उन्होंने कहा, 'अगले कुछ हफ्तों में जो फैसले होंगे, वे तय करेंगे कि वैश्विक अर्थव्यवस्था किस दिशा में जाएगी।' ब्रेंडे के मुताबिक, अगर आपसी बातचीत से मुद्दा सुलझता है, तो इसका सकारात्मक असर दिखेगा। उन्होंने उदाहरण दिया कि जापान का Nikkei इंडेक्स आज 6% उछल गया, जब अमेरिका के साथ तनाव कम करने की बातचीत शुरू हुई।


अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर से दुनिया भर को खतरा

ब्रेंडे ने आगाह किया कि अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ retaliation का नया दौर शुरू हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आयात पर 50% और टैक्स लगाने की धमकी दी है, जिससे कुल टैरिफ 100% से ऊपर जा सकते हैं। चीन ने भी कहा कि ट्रंप उस पर टैरिफ बढ़ाते हैं, तो वह फिर पलटवार करेगा।

उन्होंने कहा, "अगर ये दोनों देश अलग-अलग रास्तों पर चलने लगे (economic decoupling), तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद गंभीर होगा।" चीन ने अमेरिका पर अपनी निर्भरता घटाई है। उसका अमेरिका को निर्यात 20% से घटकर 12% पर आ गया है। लेकिन दोनों देश अभी भी एक-दूसरे पर टेक्नोलॉजी, कंपोनेंट्स और फाइनेंशियल सेक्टर में निर्भर हैं।

टैरिफ वॉर से महंगाई बढ़ने का खतरा

ब्रेंडे ने चेतावनी दी कि अगर टैरिफ वॉर नहीं रुकता, तो इसकी कीमत अमेरिका को भी चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में महंगाई बढ़ सकती है, क्योंकि इनपुट कॉस्ट बढ़ेगा। अगर ऐसा हुआ, तो फेडरल रिजर्व को दोबारा ब्याज दरें बढ़ानी पड़ेंगी, जिससे पूरा ग्लोबल मार्केट हिल सकता है।

यूरोप की भूमिका पर बोलते हुए ब्रेंडे ने बताया कि EU अभी 'वेट एंड वॉच' की नीति पर है। वो सीधे जवाबी कार्रवाई की बजाय बातचीत को तरजीह दे रहा है। यूरोपीय यूनियन की कोशिश है कि डिजिटल और सर्विस ट्रेड को टेबल पर लाकर चर्चा को संतुलित किया जाए।

उन्होंने बताया कि ट्रंप कैंप से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। जैसे, एलॉन मस्क ने EU-US के बीच कस्टम्स यूनियन या जीरो टैरिफ की बात कही है। इस पर अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों ने सकारात्मक रिएक्शन भी दिया है।

'यूरोप को कम मत आंकने की गलती न करें'

ब्रेंडे ने कहा कि कई लोग यूरोप को नजरअंदाज कर रहे हैं, लेकिन यह 'कमबैक किड' बन सकता है यानी मुश्किल हालात से उबरकर जबरदस्त वापसी कर सकता है। उन्होंने ग्रीस और स्पेन के आर्थिक सुधार का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर रेगुलेशंस आसान हुए और टैलेंट को आकर्षित करने वाले कदम उठाए गए, तो यूरोप दुनिया का अगला इनोवेशन हब बन सकता है।

उन्होंने यूरोपीय संघ और Mercosur (ब्राजील, अर्जेंटीना जैसे देशों) के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते का भी जिक्र किया, जिससे EU और लैटिन अमेरिका मिलकर वैश्विक GDP का 30% योगदान देने की स्थिति में आ गए हैं। ब्रेंडे ने कहा, "यूरोप को दो ताकतों के बीच फंसने की जरूरत नहीं है। वो अमेरिका, चीन, भारत और लैटिन अमेरिका सबके साथ मिलकर काम कर सकता है।"

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