अमेरिका की टेलिकम्युनिकेशंस कंपनी वेराइजन (Verizon) 13,000 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी कर रही है। यह कंपनी में छंटनी का अब तक का सबसे बड़ा राउंड है। इस जॉब कट के कारण कॉस्ट कटिंग और रीस्ट्रक्चरिंग हैं। वेराइजन के CEO डैन शुलमैन के एक स्टाफ मेमो के मुताबिक, नौकरियों में कटौती गुरुवार को शुरू हुई। शुलमैन का कहना है कि वेराइजन का मौजूदा कॉस्ट स्ट्रक्चर कंपनी की निवेश करने की क्षमता को सीमित करता है। शुलमैन पिछले महीने ही वेराइजन के CEO बने हैं।
वेराइजन में छंटनी की खबर सबसे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दी थी। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, शुलमैन ने लेटर में लिखा है कि कंपनी को अपने ऑपरेशन्स को आसान बनाने की जरूरत है ताकि उस जटिलता और फ्रिक्शन को दूर किया जा सके जो कंपनी को धीमा कर देती है और हमारे कस्टमर्स को परेशान करती है। सीईओ शुलमैन का यह भी कहना है कि कंपनी अपने आउटसोर्स और दूसरे बाहरी लेबर खर्चों को भी काफी कम करेगी। वेराइजन ने कंपनी छोड़ने वाले वर्कर्स के लिए 2 करोड़ डॉलर का रीस्किलिंग और करियर ट्रांजिशन फंड बनाया है।
2024 के आखिर तक कितने थे एंप्लॉयी
सिक्योरिटी फाइलिंग के मुताबिक, पिछले साल के आखिर तक वेराइजन में लगभग 100,000 फुल-टाइम कर्मचारी थे। ताजा छंटनी के तहत निकाले जा रहे कर्मचारियों की संख्या कंपनी की मैनेजमेंट वर्कफोर्स का लगभग 20% है। वेराइजन को वायरलेस फोन और होम इंटरनेट दोनों ही स्पेस में बढ़ते कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ रहा है- खासकर AT&T, T-Mobile और दूसरे बड़े मार्केट प्लेयर्स से। कंपनी में नई लीडरशिप ने कंपनी की दिशा सही करने की जरूरत पर जोर दिया है।
2025 की जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए वेराइजन ने 4.95 अरब डॉलर की कमाई और 33.82 अरब डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया। कंपनी की प्रीपेड वायरलेस सर्विसेज के लिए सब्सक्राइबर लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन पोस्टपेड कनेक्शन में 7,000 की कमी आई है।
और भी कंपनियां लगातार कर रही हैं छंटनी
वेराइजन अकेली ऐसी कंपनी नहीं है, जिसने हाल ही में वर्कफोर्स में बड़ी कटौती की घोषणा की है। Amazon, UPS, Nestlé जैसी कंपनियों में भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को निकाला जा रहा है। कुछ कंपनियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ और कंज्यूमर खर्च में बदलाव से बढ़ते ऑपरेशनल खर्च की ओर इशारा किया है। दूसरी कंपनियां बड़े पैमाने पर कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग का हवाला दे रही हैं या पैसा आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस में लगा रही हैं। छंटनियों ने हर सेक्टर में वर्कर्स की चिंता बढ़ा दी है।