पैसों की दिक्कत से जूझ रही वाडिया ग्रुप (Wadia Group) की एयरलाइन कंपनी गो फर्स्ट (Go First) ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से अंतरिम मोरेटोरियम मांगा है। एनसीएलटी के दिल्ली चैप्टर में इसकी स्वैच्छिक दिवाला याचिका पर सुनवाई शुरू हो गई है। सुनवाई के दौरान गोफर्स्ट ने आग्रह किया है कि यह मौजूदा स्थिति से उबर सकती है और इसे सिर्फ मोरेटोरियम यानी थोड़े वक्त की जरूरत है क्योंकि इसके पास संपत्ति के नाम पर सिर्फ विमान है। कंपनी ने अपने अब तक के कारोबारी रिकॉर्ड के बारे में कहा कि 2 मई को याचिका दायर करने तक कंपनी कभी डिफॉल्ट नहीं हुई थी। हालांकि अब इसके बेड़े के 54 विमानों में से 28 उड़ान नहीं भर पा रहे हैं जिसकी वजह से दिक्कतें शुरू हुईं। गो फर्स्ट के मुताबिक उसका लक्ष्य इसके 7,000 प्रत्यक्ष और 10,000 अप्रत्यक्ष एंप्लॉयीज का भविष्य फिर से बेहतर करना है।
3200 करोड़ के निवेश के बावजूद Go First संकट में
कंपनी के प्रमोटर्स ने पिछले तीन साल में कंपनी में 3200 करोड़ रुपये का निवेश किया था, लेकिन इसके बावजूद कंपनी की दिक्कतें बढ़ीं। इसकी वजह ये है कि अमेरिकी इंजन कंपनी प्रैट एंड व्हिटनी (Pratt & Whitney) इसे लगातार इंजन की सप्लाई नहीं की तो इसके ए320 नियो बेडे के 50 फीसदी विमान बंद हो गए। इसके चलते गो फर्स्ट ने 10800 करोड़ रुपये का रेवेन्यू गंवा दिया और खर्चा भी बढ़ गया। इस वजह से गोफर्स्ट ने मजबूरन एनसीएलटी में याचिका दायर करना पड़ा। कंपनी ने इसके चलते 3 से 5 मई तक सभी उड़ानें भी रद्द कर दी।
Pratt & Whitney इंजन सप्लाई क्यों नहीं कर रही
गोफर्स्ट के एयरबस ए320नियो एयरक्राफ्ट बेड़े के लिए प्रैट एंड व्हिटनी ही इंजन की सप्लाई करती है। गोफर्स्ट के मुताबिक सिंगापुर इंटरनेशनल ऑर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) ने प्रैट एंड व्हिटनी को 27 अप्रैल तक बिना किसी देरी के 10 अतिरिक्त इंजन लीज पर और फिर दिसंबर 2023 तक हर महीने 10 अतिरिक्त इंजन लीज पर देने को कहा था। यह आदेश इसलिए दिया गया था ताकि गोफर्स्ट के सभी विमान हवा में उड़ सकें और यह उबर सके। हालांकि इसे इंजन की सप्लाई नहीं हुई। प्रैट एंड व्हिटनी का कहना है कि गो फर्स्ट का ट्रैक रिकॉर्ड पेमेंट के मामले में खराब रहा है।