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Trump Tariffs: किसानों के लिए अमेरिका से क्यों भिड़ गया भारत? इन 3 बड़े मुद्दों पर अटकी US से ट्रेड डील

Trump Tariffs: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों का भारत ने दोटूक जबाव दिया है। ट्रंप ने भारत पर पहले 25% का टैरिफ बढ़ाया, लेकिन फिर उसे बढ़ाकर 50% कर दिया है। ट्रंप को लगा कि इस टैरिफ ट्रिक से भारत उनकी सभी मनमानी शर्तों को मान लेगा। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब साफ शब्दों में कह दिया है कि भारत किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार हैं

Edited By: Vikrant singhअपडेटेड Aug 07, 2025 पर 7:16 PM
Trump Tariffs: किसानों के लिए अमेरिका से क्यों भिड़ गया भारत? इन 3 बड़े मुद्दों पर अटकी US से ट्रेड डील
Trump Tariffs: डेयरी प्रोडक्ट्स भी भारत-अमेरिका ट्रेड डील में एक बड़ा टकराव का मुद्दा बना हुआ है

Trump Tariffs: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों का भारत ने दोटूक जबाव दिया है। ट्रंप ने भारत पर पहले 25% का टैरिफ लगाया, लेकिन फिर उसे बढ़ाकर 50% कर दिया है। ट्रंप को लगा कि इस टैरिफ ट्रिक से भारत उनकी सभी मनमानी शर्तों को मान लेगा। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब साफ शब्दों में कह दिया है कि भारत किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार हैं। मोदी ने MS स्वामीनाथन सेंटेनरी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए कहा, "भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूं कि इसके लिए मुझे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। भारत अपने किसानों के साथ मजबूती से खड़ा है, और मैं उनके कल्याण के लिए सभी तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हूं।"

पीएम मोदी के इस बयान के बाद भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर जारी बातचीत एक अहम मोड़ पर आ गई है। अमेरिका का एक ट्रेड डेलीगेशन अब 24 अगस्त को छठे दौर की बातचीत के लिए भारत आ रहा है। इस बातचीत से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर भारत किसानों के मुद्दे पर अमेरिका से क्यों टकरा रहा है? भारत के इतने सख्त रुख की वजह क्या है? दोनों देशों के बीच ट्रेड डील किन-किन मुद्दों पर अटक रही है?

भारत क्यों टकरा रहा है अमेरिका से?

अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बना रहा है कि वह अपने एग्रीकल्चर मार्केट को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोले। अमेरिकी चाहता है कि उसके डेयरी, पोल्ट्री, मक्का, सोयाबीन, चावल, गेहूं, एथेनॉल, फल और बादाम-पिस्ते जैसे मेवों को बिना किसी शुल्क के भारतीय मार्केट में एंट्री मिले। लेकिन भारत ने अब तक सिर्फ ड्राई फ्रूट्स और सेब जैसे कुछ उत्पादों के लिए ही बाजार खोलने पर सहमति दी है। जबकि मक्का, सोयाबीन, गेहूं और डेयरी जैसे सेक्टर्स के लिए भारत सख्ती से मना कर रहा है।

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