Yes Bank के NPA का बोझ हुआ हल्का, अब बैंक का ये है अगला बड़ा प्लान

निजी सेक्टर के दिग्गज बैंक यस बैंक (Yes Bank) के एनपीए का बोझ हल्का हो गया है। बैंक ने आज शेयर बाजारों को इसकी जानकारी दी है। एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई जानकारी के मुताबिक बैंक ने 48 हजार करोड़ रुपये के स्ट्रेस्ड लोन पोर्टफोलियो को जेसी फ्लॉवर्स एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी को ट्रांसफर कर दिया है

अपडेटेड Dec 18, 2022 पर 4:32 PM
Yes Bank ने पिछले महीने में जो जानकारी दी थी कि उसके मुताबिक जेसी फ्लॉवर्स एआरसी में इसकी 9.9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है और अब इसे बढ़ाकर 20 फीसदी करना है।

निजी सेक्टर के दिग्गज बैंक यस बैंक (Yes Bank) के एनपीए का बोझ हल्का हो गया है। बैंक ने आज शनिवार 18 दिसंबर को शेयर बाजारों को इसकी जानकारी दी है। एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई जानकारी के मुताबिक बैंक ने 48 हजार करोड़ रुपये के स्ट्रेस्ड लोन पोर्टफोलियो को जेसी फ्लॉवर्स एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी को ट्रांसफर कर दिया है। इससे पहले बैंक ने ऐलान किया था कि स्ट्रेस्ड एसेट्स के पोर्टफोलियो की बिक्री के लिए स्विस चैलेंज प्रोसेस में  JC Flowers ARC (जेसी फ्लॉवर्स एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी) विनर साबित हुई थी। बैंक की तरफ से एक्सचेंजो को भेजी गई डिटेल्स के मुताबिक 1 अप्रैल 2022 से 30 नवंबर 2022 के बीच हुई रिकवरी को एडजस्ट करते हुए 31 मार्च 2022 तक के 48 हजार करोड़ रुपये रुपये तक के एनपीए को ट्रांसफर किया है।

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15:85 के रेश्यो में हुई थी डील


यस बैंक और जेसी फ्लॉवर्स एआरसी के बीच स्ट्रेस्ड एसेट्स के ट्रांसफर के लिए 15:85 के रेश्यो में डील हुई थी। इस रेश्यो का मतलब है कि यस बैंक को डील का 15 फीसदी कैश के रूप में मिलेगा और शेष 85 फीसदी राशि सिक्योरिटीज रिसीट्स (SR) के रूप में मिलेगी। लोन ट्रांसफर होने से बैंक का लोन बुक मजबूत हो सकता है क्योंकि एनपीए घटेगा। इसके अलावा दिसंबर 2022 तिमाही के नतीजों में बैंक के पास 1677.45 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कैश दिख सकता है।

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अब आगे क्या है Yes Bank का प्लान

यस बैंक ने पिछले महीने में जो जानकारी दी थी कि उसके मुताबिक जेसी फ्लॉवर्स एआरसी में इसकी 9.9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है और अब इसे बढ़ाकर 20 फीसदी करना है। यस बैंक के एमडी और सीईओ प्रशांत कुमार ने कहा था कि बैड लोन ट्रांसफर होने और कैश मिलने के बाद जेसी फ्लॉवर्स एआरसी में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए RBI से मंजूरी ली जाएगी। केंद्रीय बैंक RBI के नियमों के मुताबिक बैंकिंग कंपनी को किसी एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी में 10 फीसदी या इससे अधिक हिस्सेदारी खरीदने के लिए आरबीआई से मंजूरी लेनी होती है।

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