Zerodha के फाउंडर ने भारतीय स्टॉक मार्केट को बताया अमेरिका से बेहतर, जानिए किस आधार पर की तुलना?

Zerodha के CEO Nithin Kamath का मानना है कि पश्चिमी देशों और उनके निवेशकों को शेयर मार्केट की बात आने पर भारत की ओर देखना चाहिए

अपडेटेड Jun 10, 2022 पर 3:57 PM
Story continues below Advertisement
नितिन कामत, Zerodha के को-फाउंडर और सीईओ

देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन ब्रोकिंग फर्म जीरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर और सीईओ (CEO) नितिन कामत (Nithin Kamath) का मानना है कि पश्चिमी देशों और उनके निवेशकों को शेयर मार्केट की बात आने पर भारत की ओर देखना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर कई सिलसिलेवार ट्वीट कर इसके पीछे के कारण भी बताए हैं।

कामत ने कहा, "हमारी आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर SEBI, DEA और DIPAM इस हफ्ते कुछ कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं और इसने मुझे हमारे कैपिटल मार्केट की तरफ सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। हम लगभग हर चीज के लिए लगातार पश्चिमी देशों (USA) की तरफ देखते हैं, लेकिन अगर बात शेयर मार्केट की हो तो पश्चिमी देशों को इस मामले में भारत की ओर देखना चाहिए। इसके पीछे कुछ कारण भी हैं।"

कामत ने अमेरिकी और भारतीय कैपिटल मार्केट के बीच अंतर को समझाते हुए कहा कि भारत में यूजर्स दोनों एक्सचेंजों पर प्राइस और लिक्विडिटी को देखत हैं, उनमें से बेहतर विकल्प का चुनाव करते हैं और फिर ऑर्डर देतें है। ब्रोकरेज फर्म सिर्फ इस ऑर्डर से जुड़े ट्रांजैक्शन को पूरा करने में मदद करते हैं। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में लगभग सही प्लेटफॉर्म एक्सजेंच को कोई महत्व नहीं देते हैं और ब्रोकर सिर्फ बोली, आस्क प्राइस और अंतिम ट्रेडिंग प्राइस को दिखाते हैं।


यह भी पढ़ें- J Kumar Infra का शेयर 12 दिन में 38% मजबूत, कमजोर बाजार में भी दिखा रहा दम

उन्होंने बताया कि ये छोटी राशियां ब्रोकर्स और दूसरे मार्केट-मेकर्स के लिए एक साल में अरबों डॉलर जुटा देती है और इसी के चलते अमेरिका में फर्म्स जीरो ब्रोकरेज पर ट्रेडिंग ऑफर करती हैं। उन्होंने कहा, "भारत में, हम निवेश पर जीरो ब्रोकरेज ऑफर कर सकते हैं क्योंकि हम एक्टिव इंट्रा-डे और F&O ट्रेडर्स से शुल्क लेते हैं। एक्विट ट्रेडर्स, निवेशकों की भरपाई करते हैं।"

कामत ने कहा कि अमेरिका में एक और अजीब नियम यह है कि अमेरिका में ब्रोकर्स के पास खोला गया खाता डिफॉल्ट रूप से मार्जिन खाता होता है। इसमें निवेशक की तरफ से खरीदे गए स्टॉक को ब्रोकर्स के नाम से रखा जाता है। ऐसे में अगर ब्रोकर्स फर्म किसी आर्थिक मुश्किल में आकर बंद होता है, तो इसका नुकसान निवेशकों को भी उठाना पड़ सकता है। वहीं भारत में शेयर डिफॉल्ट रूप से डिपॉजिटरी में निवेशकों के डीमैट अकाउंट में जमा होता है।

उन्होंने कहा, "अमेरिकी में ब्रोकर्स को एक्सचेंज के बाहर भी कुछ ऑर्डर फुलफिल करने की छूट है, जिसके चलते उनके पास कुछ अतिरिक्त ऑर्डर टाइप और फीचर हैं। लेकिन इसके अलावा हमारा शेयर मार्केट उनसे कहीं अच्छा है। यह सिर्फ रेगुलेशन या मार्केट इंफ्रा के बारे में ही नहीं है, बल्कि प्रोडक्ट ऑफरिंग के मामले में भी हम उनसे बेहतर हैं।"

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।