इंटरनेशनल मार्केट में रबर की कीमतों में तेजी लौटी है और यह 1 हफ्तों की ऊंचाई पर पहुंचा है। रबर का भाव $170 सेंट प्रति किलो के पार निकला है । दरअसल, क्रूड की तेजी से रबर की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। ब्रेंट का भाव 65 डॉलर के करीब कायम है। जबकि WTI में भी $60 के ऊपर कारोबार कर रहा है। सप्लाई में गिरावट से भी सपोर्ट मिला। खराब मौसम का उत्पादन पर असर देखने को मिल रहा है ।
इंटरनेशनल मार्केट में रबर की चाल पर नजर डालें तो 1 हफ्ते में कीमतें 1 फीसदी चढ़ी है जबकि 1 महीने में इसमें 1 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं जनवरी से अब तक रबर की कीमतों में 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। 1 साल में यह 11 फीसदी लुढ़का है।
देश में रबर के इंपोर्ट आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023-24 में 4.93 लाख टन रबर का इंपोर्ट हुआ था, जो 2024-25 में बढ़कर 5.51 लाख टन पर पहुंच गया है। 2020-21 में 4.10 लाख टन रबर का इंपोर्ट हुआ और 2022-23 में 5.29 लाख टन पर रहा था।
देश में रबी फसलों की बुआई बढ़ी
देश में रबी फसलों की बुआई बढ़ी है । पिछले साल से 27% ज्यादा बुआई बढ़ी है। रबी फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र 07 नवंबर, 2024 को 102.50 लाख हेक्टेयर था जो इस साल 07 नवम्बर तक बढ़कर 130.32 लाख हेक्टेयर हो गया है । रबी सीजन 2025 के दौरान सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी गेहूं की बुआई में दर्ज की गई है ।
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 07 नवंबर, 2025 तक गेहूं की बुवाई में 12.74 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी रिपोर्ट की गयी है ।
गेहूं की बुआई दो गुनी बढ़ी। दलहन, तिलहन की बुआई भी बढ़ी। सरसों की बुआई करीब 16% बढ़ी जबकि पिछले साल से चने की बुआई 30% बढ़ी।
तिलहन की फसलों की बुआई में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज़ की गयी है । तिलहन की फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र 07 नवंबर, 2024 को 47.35 लाख हेक्टेयर था जो 07 नवंबर, 2025 को बढ़कर 54.46 लाख हेक्टेयर हो गया । यानि, पिछले साल के मुकाबले इस साल 07 नवंबर तक तिलहन की फसलों का बुआई क्षेत्र 7.11 लाख हेक्टेयर बढ़ गया है ।