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Russian Crude Price Cap: आज से 60 डॉलर से कम पर ऑयल नहीं बेच पाएगा रूस, जानिए भारत पर पड़ेगा क्या असर

Russian Crude Price Cap: इस समझौते के दायरे में रूसी क्रूड के साथ दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स भी आएंगे। इस प्राइस लिमिट की समीक्षा हर दो महीने पर होगी। समझौते में यह कहा गया है कि लिमिट रूसी ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के मार्केट प्राइस से कम से कम 5 फीसदी कम होगी

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Dec 05, 2022 पर 11:19 AM
Russian Crude Price Cap: आज से 60 डॉलर से कम पर ऑयल नहीं बेच पाएगा रूस, जानिए भारत पर पड़ेगा क्या असर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रति बैरल क्रूड के उत्पादन पर रूस की कॉस्ट 30-40 डॉलर आती है। इसका मतलब है कि 60 डॉलर प्रति बैरल के रेट पर भी क्रूड बेचने से उसे अच्छा मुनाफा मिलेगा।

Russian Crude Price Cap: रूस के क्रूड ऑयल (Russian Crude Oil) के लिए 60 डॉलर प्रति बैरल की प्राइस लिमिट (Price Limit for Russian Oil) आज (5 दिसंबर) से लागू हो गई है। इस समझौते को Group of Seven (G7) देशों और ऑस्ट्रेलिया का समर्थन हासिल है। इसका मकसद ऑयल की बिक्री से रूस को होने वाली कमाई में कमी लाना है। इस साल फरवरी में यूक्रेन पर रूस के हमले शुरू होने के बाद अमेरिका, पश्चिमी देश और जापान ने रूस पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। इसका असर रूस के एक्सपोर्ट पर पड़ा। लेकिन, रूस ने कुछ देशों को कम कीमत पर ऑयल बेचना शुरू कर दिया। इन देशों में चीन, इंडिया और तुर्की शामिल हैं।

प्राइस कैप तय करने की वजह क्या है?

रूस के इस कदम से सस्ते भाव पर तेल खरीदने वाले देशों को तो बहुत फायदा हो रहा था, लेकिन, रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों को यह पसंद नहीं आया। इसी वजह से इन देशों ने रूस के लिए एक प्राइस लिमिट तय की है। इसका मतलब यह है कि रूस इस लिमिट से कम भाव पर किसी देश को क्रूड नहीं बेच पाएगा।

प्राइस कैप लागू होने के बाद क्या होगा?

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