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लंबे समय बाद गेहूं की होगी डिप्लोमेटिक खरीदारी! रुस से इतना हो सकता है आयात

खाने-पीने की चीजों के बाव तेजी से बढ़ रहे हैं और अगले साल लोकसभा चुनाव भी हैं। इसके अलावा कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव अब सर पर हैं। ऐसे में सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार रुस से गेहूं खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। रुस से गेहूं आने पर सरकार मार्केट में प्रभावी तरीके से दखल दे सकेगी और गेहूं की भी कीमतें नीचे आ सकेंगी

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Aug 17, 2023 पर 2:24 PM
लंबे समय बाद गेहूं की होगी डिप्लोमेटिक खरीदारी! रुस से इतना हो सकता है आयात
गेहूं की कमी को पाटने के लिए भारत को सिर्फ 30 से 40 लाख टन गेहूं की जरूरत पड़ेगी। हालांकि सूत्र के मुताबिक कीमतों पर भारी असर डालने के लिए 80 से 90 लाख टन गेहूं रुस से मंगाया जा सकता है।

खाने-पीने की चीजों के बाव तेजी से बढ़ रहे हैं और अगले साल लोकसभा चुनाव भी हैं। इसके अलावा कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव अब सर पर हैं। ऐसे में सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार रुस से गेहूं खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को यह जानकारी चार सूत्रों से मिली है। रुस से गेहूं आने पर सरकार मार्केट में प्रभावी तरीके से दखल दे सकेगी और गेहूं की भी कीमतें नीचे आ सकेंगी। पिछले महीने जुलाई में महंगाई बढ़ने की दर यानी इनफ्लेशन 15 महीने के रिकॉर्ड ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी।

इस मायने में अहम है सरकार का यह कदम

सरकार रुस से गेहूं खरीदने पर विचार कर रही है। यह खरीदारी प्राइवेट ट्रेड और सरकार से सरकार के बीच के सौदों के जरिए होगी। हालांकि इस मामले में अभी अंतिम रूप से कुछ तय नहीं हुआ है। हालांकि पिछले महीने केंद्रीय फूड मिनिस्ट्री में एक वरिष्ठ अधिकारी संजीव चोपड़ा ने कहा था कि रुस से गेहूं आयात करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। अब गेहूं आयात करने की जो योजना बन रही है, वह इस मायने में अहम है कि भारत ने कई वर्षों से डिप्लोमेटिक डील के जरिए बाहर से गेहूं नहीं मंगाया है। इससे पहले 2017 में बड़ी मात्रा में गेहूं का आयात हुआ था लेकिन यह प्राइवेट ट्रेडर्स के जरिए हुआ था जब 53 लाख टन गेहूं आया था।

कितने गेहूं का हो सकता है आयात

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