भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में फरवरी में सरकार के तख्तापलट के बाद से जनता के विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सैन्य अभियान चल रहा है। म्यांमार से हजारों लोगों ने भागकर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में शरण ली है। म्यांमार में कोरोना के मामले बढ़ने से पूर्वोत्तर राज्यों में संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, म्यांमार में सैन्य अभियान और उसके जवाब में विद्रोही गुटों के हमलों से लगभग 2,30,000 लोग विस्थापित हुए हैं।
म्यांमार के सेना ने जनता के विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ एक क्रूर अभियान चलाया है जिसमें अभी तक लगभग 930 लोग मारे गए हैं और 5,300 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
कोरोना को लेकर भी म्यांमार की स्थिति खराब है। पिछले वर्ष की शुरुआत में महामारी के फैलने के बाद से अब तक वहां 6,450 से अधिक मृत्यु की रिपोर्ट है। जुलाई के तीन सप्ताह में 2,000 से अधिक लोगों की कोरोना से मौत हुई है।
पूर्वोत्तर राज्यों में पहुंच रहे म्यांमार से शरणार्थी
मिजोरम और मणिपुर में म्यांमार से बड़ी संख्या में शरणार्थी पहुंचे हैं।
केंद्र सरकार ने अप्रैल में पूर्वोत्तर राज्यों से शरणार्थियों का रिकॉर्ड रखने को कहा था और उन्हें म्यांमार में स्थिति में सुधार होने तक रहने की अनुमति दी थी। मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर म्यांमार से आने वाले अवैध लोगों पर नियंत्रण के लिए कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है।
स्थानीय एनजीओ का अनुमान है कि म्यांमार के लगभग 16,000 नागरिकों ने मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड में शरण ली है। इनमें से लगभग 10,000 केवल मिजोरम में हैं।