विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार कैंसर आज के समय में दुनिया भर में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है। बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान और बढ़ता प्रदूषण इसकी बड़ी वजहें हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ चीजों को अपनी रोजाना की डाइट में शामिल कर के इस जानलेवा बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है? सही खानपान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में मदद करता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स और कई रिसर्च भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि कुछ सुपरफूड्स में ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स और पोषक तत्व होते हैं, जो कैंसर को जड़ से पनपने नहीं देते।
तो आइए जानें वो पांच खास फूड्स, जिन्हें आप अपनी डेली डाइट में शामिल करके खुद को और अपने परिवार को कैंसर के खतरे से काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं।
क्रूसीफेरस सब्जियों की फैमिली में आने वाला ब्रोकोली कई रिसर्च में कैंसर से बचाव के लिए असरदार माना गया है। इसमें सल्फोराफेन नामक कंपाउंड होता है, जो कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है। रिसर्च बताती हैं कि ब्रोकोली खाने से कोलन और कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा कम हो सकता है।
ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी या रास्पबेरी इन सभी बेरीज में एंथोसायनिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होते हैं। ये ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं, जिससे कैंसर कोशिकाओं के पनपने की संभावना घटती है। एक स्टडी में पाया गया कि बिलबेरी एक्सट्रैक्ट ने कोलोरेक्टल कैंसर सेल्स की ग्रोथ को 7% तक घटाया।
गाजर में मौजूद कैरोटेनॉइड्स ना सिर्फ आंखों की सेहत के लिए बल्कि कैंसर के खतरे को कम करने में भी मदद करते हैं। एक स्टडी के अनुसार, गाजर खाने से प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा 18% तक घट सकता है।
क्विनोआ, ब्राउन राइस और ओट्स जैसे साबुत अनाज फाइबर से भरपूर होते हैं। फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है और कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा कम करता है। रिफाइंड अनाज की जगह साबुत अनाज का सेवन करें, ये गट हेल्थ को भी बेहतर बनाता है।
जैतून का तेल यानी ऑलिव ऑयल में मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स और पॉलिफिनॉल जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं। रिसर्च बताती है कि ऑलिव ऑयल ज्यादा इस्तेमाल करने वालों में ब्रेस्ट और डाइजेस्टिव सिस्टम के कैंसर का खतरा कम पाया गया।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।