डायबिटीज दुनियाभर में तेजी से फैल रही है। करोड़ों की तादाद में लोग इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। डायबिटीज से परेशान लोगों को ब्लड शुगर बढ़ जाता है। जिसे जिंदगी भर कंट्रोल करने की जरूरत रहती है। डायबिटीज किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। जिन लोगों में अत्यधिक मोटापा रहता है। फिजिकल एक्टिविटी बेहद कम रहती है। उन्हें डायबिटीज का खतरा ज्यादा रहता है। शुरुआती दौर में लोग डायबिटीज को समझ नहीं पाते हैं। यह साइलेंट किलर बीमारी होती है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर किस वजह से लोग सबसे ज्यादा डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं।
हर पांच में से एक इंसान को पता ही नहीं होता कि उसे डायबिटीज है। डायबिटीज में शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता है या फिर जितना इंसुलिन बनता है बॉडी उसका इतना इस्तेमाल नहीं कर पाती है। शरीर में इंसुलिन की कमी से कोशिकाएं प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं। बहुत समय तक ऐसी स्थिति रहने पर शरीर में दिल, आंखों की कमजोरी या फिर किडनी से जुड़ी कई तरह की गंभीर बीमारियां हो जाती हैं।
हेल्थ से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर आपके परिवार में किसी को डायबिटीज है तो फिर घर में सभी डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं जिन लोगों के घर में किसी को डायबिटीज नहीं है। ऐसे लोगों के लिए डायबिटीज का जोखिम कम होता है।
मोटापा है डायबिटीज का काल
खराब लाइफस्टाइल के चलते दुनियाभर के लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं। मोटापे का शिकार लोगों को अपना वजन नियंत्रण करना मुश्किल हो जाता है। कुछ लोगों की जीन में ही मोटापे की समस्या होती है। यह पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है। अगर मोटापे को कंट्रोल नहीं किया तो डायबिटीज का खतरा ज्यादा रहता है।
बॉडी को हमेशा एक्टिव रखना बहुत जरूरी है। जो लोग एक्सरसाइज नहीं करते हैं। उनमें क्रॉनिक डिजीज होने का खतरा ज्यादा होता है। एक रिसर्च के मुताबिक जो लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं वो डायबिटीज से बचे रह सकते हैं।
बहुत ज्यादा मीठा खाने से ब्लड शुगर बढ़ जाता है। इस शुगर को कंट्रोल करने के लिए शरीर इंसुलिन छोड़ता है। समय के साथ-साथ शुगर की ज्यादा मात्रा शरीर को इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील बना देते हैं। इससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि ज्यादा मीठा खाना ही डायबिटीज का दोष नहीं है। अन्य कई बड़े कारण भी हैं।
किस उम्र में कितना होना चाहिए ब्लड शुगर लेवल
बता दें कि फास्टिंग ब्लड शुगर का नॉर्मल रेंज 80-100 के बीच माना जाता है। अगर यह 100 से 125 है तो इसे प्रीडायबिटीज माना जाता है। अगर यह 126 mg/dL से ज्यादा होता है, तो इसे डायबिटिक माना जाता है। हालांकि इसके लिए HBA1C टेस्ट के जरिए कन्फर्म किया जाता है। बता दें कि HbA1c टेस्ट में 3 महीने की डायबिटीज की रिपोर्ट आ जाती है। जिसमें यह तय होता है कि मरीज डायबिटीज का शिकार है या नहीं। वहीं 40 से 60 साल के उम्र के लोगों को प्री डायबिटीज के लक्षणों से हमेशा सावधान रहना चाहिए। HbA1c टेस्ट में अगर 5.7 फीसदी 6.4 फीसदी है तो प्री डायबिटिक के शिकार हो सकते हैं। इससे ज्यादा होने पर डायबिटीज से पीड़ित माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।