गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक पहुंचाने और पेट को स्वस्थ रखने के लिए दही को सबसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है। ये न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसके पीछे छिपे कई जबरदस्त स्वास्थ्य लाभ भी हैं। खासतौर पर सुबह खाली पेट या नाश्ते में दही का सेवन करने से न केवल पाचन दुरुस्त रहता है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों से भी बचाव हो सकता है। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में ये खुलासा हुआ है कि नियमित रूप से दही खाने से आंत के कैंसर, खासकर कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा कम होता है।
इसके पीछे दही में मौजूद प्रोबायोटिक बैक्टीरिया की भूमिका बताई गई है, जो आंतों की सेहत सुधारते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि दही से हमें क्या-क्या फायदे मिलते हैं और ये कैसे कैंसर जैसी घातक बीमारी के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है।
क्यों है दही हेल्थ का पावरहाउस?
दही में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन B-12, B-2, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके साथ ही इसमें मौजूद प्रोबायोटिक बैक्टीरिया – जैसे लैक्टोबैसिलस, लैक्टोकोकस और स्ट्रेप्टोकोकस – आंतों की सेहत को बेहतर बनाते हैं। ये बैक्टीरिया दूध में मौजूद लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदलते हैं, जिससे दही बनता है और पाचन में सुधार होता है।
आंतों के कैंसर को रोकने में कारगर
एक स्टडी में खुलासा हुआ कि जो लोग हफ्ते में कम से कम दो बार दही खाते हैं, उनमें " बाउल कैंसर " होने का खतरा 20% तक कम था। यह एक प्रकार का आंत का कैंसर है। स्टडी में 1.5 लाख लोगों को शामिल किया गया, जिसमें 3,079 लोगों को कोलोरेक्टल कैंसर था। जिन लोगों ने लंबे समय तक दही का सेवन किया था, उनमें ये कैंसर कम पाया गया।
बिफीडोबैक्टीरियम आंतों का रक्षक
दही में पाया जाने वाला बिफीडोबैक्टीरियम नामक अच्छा बैक्टीरिया आंतों में सूजन को कम करता है और कैंसर के खतरे को घटाता है। ये शरीर में ऐसे तत्व उत्पन्न करता है जो एंटीऑक्सिडेंट और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, जिससे कैंसर से लड़ने की ताकत मिलती है।
पाचन और एनर्जी के लिए वरदान
गर्मी के मौसम में दही और चीनी एक साथ खाने से पेट ठंडा रहता है और शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है। दही दूध की तुलना में जल्दी पचता है, जिससे पेट भी हल्का महसूस होता है।
कैंसर से बचाव के लिए अपनाएं ये हेल्दी आदतें
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, हर 10 में से 1 कैंसर का मामला आंतों से जुड़ा होता है। गलत खानपान, प्रोसेस्ड मीट, फल-सब्जियों की कमी, शराब और स्मोकिंग जैसे कारणों से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ता है। ऐसे में दही के साथ-साथ फाइबर युक्त आहार, ताजे फल-सब्जियां और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।