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New Blood Group CRIB: कर्नाटक की महिला में मिला दुनिया का पहला और दुर्लभ ब्लड ग्रुप CRIB, जानें इसके मायने

New Blood Group CRIB: कर्नाटक में दुर्लभ रक्त समूह CRIB की खोज से चिकित्सा जगत के इतिहास में नया पेज जुड़ गया है। 10 महीनों के गहरे शोध के बाद इसे जून 2025 में मिलान में हुई बैठक में मान्यता दी गई। आइए चिकित्सा क्षेत्र के लिए इसके अर्थ और महत्व को समझें

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 01, 2025 पर 2:31 PM
New Blood Group CRIB: कर्नाटक की महिला में मिला दुनिया का पहला और दुर्लभ ब्लड ग्रुप CRIB, जानें इसके मायने

भारत के मेडिकल क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया के चिकित्सा इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। कर्नाटक राज्य के कोलार क्षेत्र की 38 साल की महिला में दुनिया का पहला और सबसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप मिला है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये मामला तब सामने आया, जब महिला को एक सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया। खून की जांच में पता चला कि उनका खून O Rh+ श्रेणी का होने के बावजूद उपलब्ध किसी भी ‘O’ पॉजिटिव डोनर यूनिट से मेल नहीं खा रहा है। इस मामले को रोटरी बेंगलुरू टीटीके ब्लड सेंटर के पास भेजा गया। इसके बाद ब्रिटेन के ब्रिस्टल स्थित इंटरनेशनल ब्लड ग्रुप रेफरेंस लैबोरेटरी (IBGRL) में भेजा गया।

परिवार के 20 सदस्यों के ब्लड ग्रुप की हुई जांच

रोटरी बेंगलुरू टीटीके ब्लड सेंटर के डॉ. अंकित माथुर ने बताया, ‘उन्नत सेरोलॉजिकल टेस्टिंग के इस्तेमाल के बाद हमें पता चला कि उनके खून का नमूना ‘पैनरिएक्टिव’ यानी उपलब्ध किसी भी रक्त समूह के साथ वह प्रतिकूल (रिएक्टिव) है। इसके बाद उनके खून की दुर्लभ या नए एंटीजेन समूह की खोज की संभावना बढ़ गई। इसके बाद हमने महिला के परिवार के कम से कम 20 लोगों के खून की जांच की। मगर उनका खून किसी से भी मेल नहीं खा रहा था।’

10 महीनों की जांच के बाद हुई घोषणा

यहां 10 महीनों के शोध और जांच के बाद एक नए रक्त एंटीजन की खोज हुई, जिसे ‘CRIB’ नाम दिया गया। इस खोज की घोषणा इटली के मिलान शहर में जून 2025 में हुई रीजनल कांग्रेस ऑफ द इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन (ISBT) में की गई। इस तरह ये महिला वैश्विक स्तर पर इस ब्लड ग्रुप की पहली व्यक्ति बन गई। खास बात ये रही कि इनकी सर्जरी में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं पड़ी।

क्यों दिया गया CRIB नाम

नए ब्लड ग्रुप को CRIB नाम भारत के शहर बेंगलुरू में मिले इसमें पहले मामले की वजह से दी गई है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने क्रोमर में नए एंटीजेन CR की पहचान की। इसकी उत्पत्ति की जगह को पहचान देने के लिए इंडिया का I और बेंगलुरू का B। इस तरह इस नए रक्त समूह का नाम CRIB पड़ा।

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