Diabetes: डायबिटीज मरीजों के लिए वरदान है भारत में मिलने वाला ये पौधा, ऐसे करता है काम, जान लें इसके बारे में

Diabetes: जिम्नेमा सिल्वेस्ट्रे को आमतौर पर 'शुगर किलर' कहा जाता है। यह एक बेलनुमा लकड़ी की झाड़ी है, जो भारत, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में पाई जाती है। इस पौधे का इस्तेमाल नया नहीं है - इसे आयुर्वेदिक चिकित्सा में सैकड़ों सालों से डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है

अपडेटेड Jun 20, 2025 पर 10:43 PM
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डायबिटीज के लिए रामबाण, लिपिड प्रोफाइल भी होगा कंट्रोल

Sugar Killer Plant : अगर आपको हर खाने के बाद कुछ मीठा खाने की इच्छा होती है या बिना मिठाई के दिन नहीं कटता, तो आप अकेले नहीं हैं। मीठा खाने की ललक काफी आम और मजबूत होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका एक प्राकृतिक समाधान भी है? जिम्नेमा सिल्वेस्ट्रे,  'शुगर किलर' भी कहा जाता है, एक ऐसा पौधा है जो हाल के दिनों में खूब चर्चा में है।  इसका कारण है, इस पौधे की वो खासियत जिससे ये चीनी की तलब को कम करता है और डायबिटीज को मैनेज करने में मदद करता है।  इस पौधे स्थानीय भाषा में गुड़मार भी कहा जाता है।

जिम्नेमा सिल्वेस्ट्रे कैसे करता है चीनी पर वार?

जिम्नेमा सिल्वेस्ट्रे को आमतौर पर 'शुगर किलर' कहा जाता है। यह एक बेलनुमा लकड़ी की झाड़ी है, जो भारत, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में पाई जाती है। इस पौधे का इस्तेमाल नया नहीं है — इसे आयुर्वेदिक चिकित्सा में सैकड़ों सालों से डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है। हाल के वर्षों में यह पौधा एक बार फिर चर्चा में आया है, खासकर उन लोगों के लिए जो मीठा खाने की आदत से परेशान हैं या ब्लड शुगर कंट्रोल में दिक्कत महसूस करते हैं।


कैसे करता है ये काम?

जिम्नेमा सिल्वेस्ट्रे. पौधे में पाया जाने वाला जिम्नेमिक एसिड हमारे स्वाद रिसेप्टर्स पर असर डालता है और मीठे स्वाद को पहचानने की क्षमता को कुछ समय के लिए कम कर देता है। यानी, जब आप मीठा खाएं भी, तो उसका स्वाद उतना मज़ेदार नहीं लगेगा – जिससे मीठे की तलब खुद-ब-खुद घटने लगती है। इस वजह से यह पौधा आजकल हेल्थ और फिटनेस के प्रति सजग लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है। यह न सिर्फ मीठा खाने की आदत को नियंत्रित करने में मदद करता है, बल्कि ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में भी सहायक हो सकता है।

दुनिया भर में बढ़ रहा है डायबिटीज का खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में 42 करोड़ से ज़्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और ये संख्या लगातार बढ़ रही है। डायबिटीज में शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता या उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। अगर शरीर में ज्यादा समय तक शुगर लेवल हाई बना रहे, तो इसका असर आंखों, किडनी, हृदय और नसों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि ब्लड शुगर को नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी होता है।

जिम्नेमा सिल्वेस्ट्रे कैसे करता है मदद?

सिर्फ चीनी की तलब को रोकने के अलावा, जिम्नेमा सिल्वेस्ट्रे डायबिटीज़ को कंट्रोल करने में भी सहायक हो सकता है। इस पौधे में मौजूद बायोएक्टिव तत्व शरीर में इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं और आंतों में चीनी के अवशोषण को कम कर देते हैं। इससे ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है। हालांकि यह पौधा डायबिटीज का इलाज नहीं है, लेकिन यह एक कारगर सपोर्ट की तरह काम कर सकता है—खासतौर पर उन लोगों के लिए जो टाइप 2 डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं। एक बेहतर और संतुलित जीवनशैली की दिशा में यह एक प्राकृतिक और प्रभावी कदम हो सकता है।

वजन कम करने में भी करता है काम?

2013 में चूहों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जब उन्हें ज्यादा वसा वाला खाना दिया गया और साथ में जिम्नेमा का अर्क भी दिया गया, तो उनका वजन कम हुआ। एक दूसरे अध्ययन में भी यही पाया गया कि जब चूहों को जिम्नेमा सिल्वेस्ट्रे का पानी में घुला अर्क पिलाया गया, तो उनके शरीर का वजन घटने लगा। हालांकि ये नतीजे उम्मीद जगाते हैं, लेकिन अभी इस विषय पर और अधिक रिसर्च की ज़रूरत है। साथ ही, यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि जिम्नेमा कुछ दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकता है और इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।

यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए दी गई है और इंटरनेट पर उपलब्ध शोध पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी तरह की डॉक्टर की सलाह को बदलना नहीं है। अगर आप जिम्नेमा का इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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