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Intrahepatic ectopic pregnancy: भारत में लीवर में भ्रूण का पहला मामला आया सामने, जानिए क्या होती है Ectopic Pregnancy

लीवर में भ्रूण विकसित होने का भारत में अपनी तरह का पहला मामला सामने आया है। इस मामले से देश के चिकित्सा जगत की नींद उड़ गई है। इस तरह के केस में गर्भवती महिला को किसी तरह का खतरा होता है या नहीं ? आइए जानें इसके बारे में

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 29, 2025 पर 1:53 PM
Intrahepatic ectopic pregnancy: भारत में लीवर में भ्रूण का पहला मामला आया सामने, जानिए क्या होती है Ectopic Pregnancy

उत्तर प्रदेश में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जिसने पूरे चिकित्सा जगत की नींद उड़ा दी है। ये घटना बुलंदशहर की है, जहां डॉक्टरों को उस समय झटका लगा जब एक 30 साल की महिला के एमआरआई स्कैन में पता चला कि वो 12 हफ्तों की गर्भवती है। उसका भ्रूण यूट्रस में न पल कर लीवर में विकसित हो रहा है।

क्या है ये स्थिति

इस दुर्लभ और चिंताजनक स्थिति को इंट्राहेप्टिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहते हैं। इसमें भ्रूण लीवर ऊतकों के भीतर प्रत्यारोपित और विकसित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये भारत में हुआ अब तक का पहला मामला है।

क्या होती है एक्टोपिक प्रेग्नेंसी

एनएचएस के मुताबिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में निषेचित अंडा गर्भाशय के बाहर प्रत्यारोपित हो जाता है। आमतौर पर ऐसा फेलोपियन ट्यूब में से किसी एक में होता है। ये ट्यूब गर्भाशय से अंडाशय (ओवरी) को जोड़ती है। अगर, भ्रूण फेलोपियन ट्यूब में स्थित हो जाता है, तो इसका सही से विकास नहीं हो पाता है और ऐसी गर्भावस्था को जारी रखने पर मां की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है।

इतने तरह की होती है एक्टोपिक प्रेग्नेंसी

ट्यूबल एक्टोपिक प्रेग्नेंसी : ये तब होता है, जब एक निशेचित अंडा फेलोपियन ट्यूब में प्रत्यारोपित हो जाता है।

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