Heart Attacks And Covid Vaccine : कर्नाटक के हासन जिले में एक महीने के भीतर 20 से अधिक युवाओं की हार्ट अटैक से मौत के बाद लोग हैरान हैं। मरने वालों की उम्र किसी की 20 साल तो किसी की 30 साल है। वहीं अब इन मौते को लेकर लोगों ने कोविड वैक्सीन का कनेक्शन जोड़ा था। हालांकि अचानक हुई इन मौतों की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया था। कमिटी ने अपने रिपोर्ट में कहा था कि, इन मौतों और कोविड वैक्सीन (Covid Vaccine) का आपस में कोई कनेक्शन नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़ोतरी की वजह पहले से मौजूद कई फैक्टर हैं, जैसे कि हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और डायबिटीज। श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. के.एस. रवींद्रनाथ ने न्यूज18 से बात करते हुए कहा, "हमें कोविड या वैक्सीन और हार्ट अटैक के बीच कोई सीधा संबंध नहीं मिला है।"
कोविड के बाद बढ़े हार्ट अटैक के मामले
कर्नाटक के मंत्री दिनेश गुंडू राव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कोविड के बाद आम लोगों में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में लगभग 4-5% की बढ़ोतरी देखी गई है। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि इसका सीधा संबंध न तो कोविड से है और न ही कोविड वैक्सीन से। उन्होंने कहा, "हमारे रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कोविड और अचानक हार्ट अटैक से होने वाली मौतों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।" गुंडू राव ने बताया कि इस बढ़ोतरी की वजह हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, डायबिटीज़, मोटापा और स्मोकिंग जैसे जोखिम कारक हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि "कोविड वैक्सीन का कोई निगेटिव इम्पैक्ट नहीं पाया गया है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि कोविड के बाद इन जोखिम कारकों में बढ़ोतरी जरूर देखी गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वैक्सीन इसके लिए जिम्मेदार है।
हार्ट अटैक और कोविड वैक्सीन में कोई सीधा संबंध?
डॉ. केएस रवींद्रनाथ ने बताया कि जयदेव अस्पताल में किए गए एक शुरुआती अध्ययन में अप्रैल और मई के बीच 45 साल से कम उम्र के 200 से ज़्यादा मरीजों की जांच की गई। इस अध्ययन में समय से पहले होने वाले हृदय रोग और कोविड संक्रमण या वैक्सीन के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया। हालांकि, उन्होंने यह ज़रूर बताया कि कोविड के बाद लोगों के जोखिम कारकों में noticeable इज़ाफा हुआ है। डॉ. रवींद्रनाथ ने कहा, “कोविड के बाद हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और डायबिटीज़ जैसे जोखिमों में 6-8% तक की बढ़ोतरी देखी गई है।” उन्होंने यह भी बताया कि यह बदलाव सिर्फ बुज़ुर्गों में नहीं, बल्कि 20 से 30 साल के युवाओं में भी देखा गया है। इसका कारण उन्होंने कोविड के बाद की मानसिक और शारीरिक थकावट, तनाव, जीवनशैली में बदलाव, हार्मोनल असर और नौकरी जाने जैसी समस्याओं को माना है।
हसन जिलें में क्यों हो रही अचानक मौतें?
हसन जिले में हाल ही में दिल के दौरे से हुई मौतों की जांच को लेकर डॉ. केएस रवींद्रनाथ ने कहा कि यह कोई अलग या नई बीमारी नहीं है, बल्कि देशभर में देखी जा रही एक सामान्य और बढ़ता हुआ ट्रेंड का हिस्सा है। उन्होंने बताया, "हसन के ज़्यादातर निजी अस्पतालों में हमने देखा है कि दिल के दौरे के मामलों में 200 से ज़्यादा मरीज भर्ती हुए हैं।" डॉ. रवींद्रनाथ के अनुसार, किसी भी हार्ट अटैक में मृत्यु दर सामान्यतः 5-6% होती है, जो कई बार 8% तक पहुंच सकती है। ऐसे में जब मरीजों की संख्या ज़्यादा होती है, तो मौतों की संख्या भी गंभीर रूप ले लेती है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में दिल के दौरे की घटनाएं पश्चिमी देशों की तुलना में लगभग 10 साल पहले यानी कम उम्र में देखने को मिल रही हैं।
रिपोर्ट में कुछ अहम सुझाव दिए गए हैं