Liver Cancer के मामले 2050 तक दोगुने होने की आशंका, रीसर्च में दावा, बढ़ता मोटापा इसके लिए जिम्मदार

मोटापे की बढ़ती दर की वजह से 2050 तक लीवर कैंसर के मामले दोगुने होने की आशंका है। एक नए शोध में यह दावा किया गया है। लीवर कैंसर के बढ़ते खतरों से कई वयस्क अब भी अंजान हैं। इस विषय पर हुए शोध में लीवर कैंसर के बारे में विस्तार से बताया गया है। आइए जानें

अपडेटेड Jul 30, 2025 पर 7:51 PM
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ये तो हम सभी जानते हैं कि मोटापा सेहत का बहुत बड़ा दुश्मन है। लेकिन ये बात चौंकाती है कि मोटापा लीवर कैंसर का कारण भी बन सकता है। हाल में हुए एक शोध में विशेषज्ञों ने इसका दावा किया है। उनका कहना है कि 2050 तक लीवर कैंसर के मामले बढ़ कर दोगुने हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने इसके लिए बढ़ती मोटापे की दर को आंशिक रूप से जिम्मेदार माना है।

यह रिसर्च लैंसेट कमीशन ऑन लीवर कैंसर ने किया। इसकी रिपोर्ट में बताया गया है कि, दुनियाभर में लीवर कैंसर के मामले 2022 में 8.7 लाख से बढ़कर 2050 तक 15.2 लाख हो जाएंगे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मोटापे से जुड़े लीवर कैंसर के मामलों की संख्या 5% से बढ़कर 11% हो जाएगी। इससे बचने और बढ़ने से रोकने के लिए और ज्यादा कोशिश करने की जरूरत है। तो आइए जानते हैं क्या होता है लीवर कैंसर इससे कैसे बचा जा सकता है ?

लीवर कैंसर क्या है और कैसे होता है ?

लीवर के अंदर जो कैंसर विकसित होता है, उसे प्राइमरी लीवर कैंसर कहते हैं। वहीं, शरीर के किसी और हिस्से में कैंसर हो और लीवर को अपनी चपेट में ले लेता है, तो वो सेकेंड्री लीवर कैंसर होता है। ये जानकारी एडिनबरा रॉयल इन्फर्मरी में कंसल्टेंट ट्रांसप्लांट और हेपेटोबिलरी सर्जन होने के साथ ही ब्रिटिश लीवर ट्रस्ट की अन्या अडायर ने दी। उन्होंने बताया कि लीवर कैंसर कितना गंभीर है ये मरीज की सामान्य सेहत, लीवर में कैंसर कहां है, ये कितना बड़ा है, ये फैल गया है या नहीं और प्राइमरी है या सेकेंड्री है, पर निर्भर करता है।

क्या है HCC ?

ब्रिटिश लीवर ट्रस्ट का भाग लीवर कैंसर ट्रस्ट के मुताबिक लीवर कैंसर लीवर टिश्यू के भीतर विकसित हो सकता है, जिसे हेपेटोसेल्युलर कार्सिनोमा (HCC) कहते हैं। जब हेपेटोसाइट्स सेल्स क्षमता से बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ने और मल्टिप्लाई होने लगते हैं तब एचसीसी होता है। हालांकि, लीवर के बाइल डक्ट सिस्टम में भी कैंसर विकसित हो सकता है, जिसे कोलांजियेकार्सिनोमा कहते हैं।


लीवर कैंसर ट्रस्ट के मुताबिक लीवर में पनपने वाले कैंसर के चार में से तीन मामले एचसीसी के होते हैं। ये आमतौर से पहले से क्षतिग्रस्त लीवर में होता है, जिसे सिरोसिस कहते हैं। अडायर ने कहा कि आपको शराब पीने की वजह से स्कार्ड सिरोटिक लीवर की स्थिति हो सकती है। लेकिन नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लीवर डिजीज के कारण भी हो सकता है।

क्या हैं कुछ साधारण लक्षण?

एचसीसी के आमतौर से नजर आने वाले लक्षण नहीं होते हैं। आमतौर पर इसका पता किसी और कारण से किए गए स्कैन में संयोग होता है। व्यक्ति को पता नहीं होता कि उसके लिवर में घाव है।

लीवर कैंसर अक्सर शुरुआती चरणों में पकड़ में नहीं आता। स्थिति गंभीर होने पर मरीज में पीलिया, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना, थकान या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

पीलिया होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। खासतौर पर बिना खास वजह के वजन कम होना भी एक खतरे की घंटी है।

क्या हैं इलाज के विकल्प?

  1. एडेयर के मुताबिक लीवर कैंसर के इलाज के लिए सर्जरी सहित कई विकल्प हैं।
  2. कैंसर का पता जल्दी चलने पर लीवर ट्रांसप्लांट एक विकल्प है। वो भी तब जब मरीज ट्रांसप्लांट नियमों के अंतर्गत आते हैं।
  3. कैंसर अगर किसी एक जगह पर है और बाली लीवर अच्छी तरह काम कर रहा है तो लीवर रिसेक्शन कराया जा सकता है, जिसमें लीवर का एक हिस्सा निकाल दिया जाता है।
  4. जिन मरीजों के लीवर में एक भी घाव तीन सेंटीमीटर से कम है, वे एब्लेशन का विकल्प चुन सकते हैं। इसमें बहुत ठंड या गर्मी के जरिये लक्षित टिश्यू को खत्म किया जाता है।
  5. लीवर कैंसर के अन्य इलाज में कीमोएम्बोलाइजेशन या सीधे ट्यूमर पर विकिरण से हमला किया जाता है।

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