Monsoon Health Tips: मॉनसून के मौसम में ये Amla-Turmeric Juice रखेगा सेहत का ध्यान, जानें इसकी रेसिपी

मॉनसून का मौसम तो बहुत अच्छा लगता है, मगर इसमें बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अपने खानपान और लाइफस्टाइल को लेकर हमें पूरी तरह से सतर्क रहना चाहिए। आंवला और हल्दी का जूस इसमें आपकी मदद कर सकता है। आइये जानते हैं इसकी रेसिपी और जूस के गुणों के बारे में

अपडेटेड Jul 09, 2025 पर 6:32 PM
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बारिश का मौसम रिमझिम फुहारों के साथ बीमारियां भी लाता है। गर्मी, उमस और पसीने की तिकड़ी मिल कर बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। ऐसे मौसम में इम्युनिटी का खास ध्यान रखना चाहिए। आयुर्वेद में बताये कुछ नुस्खे इम्युनिटी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इनमें से एक है आंवला और हल्दी का जूस। इसके शॉट के साथ दिन की शुरुआत शरीर और दिमाग को हेल्दी रखने का एक स्मार्ट तरीका हो सकता है। आयुर्वेद आंवला और हल्दी को सुपरहीरो मानता है जो शरीर की रक्षा करने में मदद कर सकते हैं। इस मौसम में आंवला-हल्दी के जूस पीने के 4 कारण और इसकी रेसिपी भी यहां दे रहे हैं।

आंवला और हल्दी का जूस कैसे बनाएं

आंवला-हल्दी का जूस बनाने के लिए, 1 आंवला और आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर या 1 इंच कच्ची हल्दी ले लें। इन्हें बहुत कम पानी के साथ ब्लेंडर में डालकर पीस लें। इस प्यूरी को छानकर जूस अलग कर लें। फिर इसमें एक चुटकी काली मिर्च, 1/4 छोटा चम्मच शहद और नींबू के रस की कुछ बूँदें डालें। इस जूस को सुबह खाली पेट पीना अच्छा माना जाता है।


इम्युनिटी बढ़ाता है जूस

आँवला विटामिन सी से भरपूर होता है, जबकि हल्दी में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। ये दोनों खांसी जुकाम जैसे मौसमी इनफेक्शन से लड़ने के लिए इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक, हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन कंपाउंड इम्युनिटी को दबाने वाले Treg सेल्स को कम करता है और Th1 सेल्स को स्टिम्युलेट करता है और इंटरफेरॉन-गामा (IFN-γ) के उत्पादन को बढ़ाकर बैलेंस इम्युनिटी देता है, जो एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। आँवला ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है और इम्यून हेल्थ के लिए जरूरी एंडोथेलियल फंक्शन और सूजन संबंधी बायोमार्कर, को बेहतर बनाता है।

डाइजेशन में सुधार

मानसून के मौसम में अक्सर डाइजेशन की दिक्कत हो जाती है। ऐसे में, आंवला पेट के एसिड को संतुलित करने में मदद करता है, और हल्दी पित्त उत्पादन को स्टिम्युलेट करती है, जिससे डाइजेशन सही होता है और पेट फूलना कम होता है। आयुर्वेद के मुताबिक, आंवला डाइजेस्टिव फायर को बेहतर बनाने में मदद करता है। वर्ल्ड जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के अनुसार, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन आंत में सूजन कम करने में मदद करता है, जो इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) और सूजन आंत्र रोग के लिए फायदेमंद है।

लिवर को डिटॉक्सीफाई करता है

आंवला-हल्दी का जूस एक नेचुरल डिटॉक्स ड्रिंक है, जो लीवर और खून से जहरीले पदार्थ बाहर निकालने में मदद करता है। एक रिसर्च के मुताबिक, आंवले में विटामिन सी, टैनिन, फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट तत्व हैं। ये हानिकारक फ्री रैडिकल्स को बेअसर करने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं, जो लिवर खराब होने का एक प्रमुख कारण है।

स्किन को करता है प्रोटेक्ट

मानसून में ह्यूमिडिटी की वजह से स्किन पोर्स बंद हो जाते हैं, जिससे पसीना रुकता है और मुंहासे पैदा होते हैं। इस मौसम में ऑयली स्किन वालों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। ऐसे मौसम में आंवले का रस पीने से कोलेजन उत्पादन बढ़ता है और ये सूजन व मुँहासों का कारण बनने वाले फ्री रैडिकल्स से लड़ता है। यह रक्त को भी साफ करता है। वहीं, हल्दी मुँहासों का कारण बनने वाले बैक्टीरिया को मारने में मदद करती है और बंद पोर्स में नए मुँहासे बनने से रोकती है।

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