केला हर मौसम में फायदेमंद है। सर्दियों में भी इसे खाने से कोई नुकसान नहीं होता। अगर आपको सर्दी-खांसी है तो ज्यादा केला न खाएं। यह एक ऐसा फल है जो शरीर में आयरन और कैल्शियम की कमी को पूरा करता है। इसके साथ ही कार्बोहाइड्रेट की पूर्ति करके शरीर में एक नई ऊर्जा भर देते हैं। लेकिन बाजार में इन दिनों नकली और असली केलों की भरमार हो गई है। बहुत से केलों को गैस के जरे पकाया जाता है। ऐसे में ये केले किसी धीमा जहर से कम नहीं है। इन केलों से सेहत की बैंड बज जाएगी।
दरअसल, आजकल केलों को जल्दी पकाने के लिए कई शॉर्टकट अपनाए जा रहे हैं। कार्बाइड से केले पकाए जा रहे हैं। ऐसे में जानते हैं कि किस तरह से कार्बाइड से पके केले की पहचान की जा सकती है और अगर ये केले खा लेते हैं तो इससे क्या नुकसान होगा...
असली और नकली केले की ऐसे करें पहचान
बहुत से लोग केले को पकाने के लिए कार्बाइड का इस्तेमाल करते हैं। यह बाजार में आसानी से मिल जाता है। ऐसे में कार्बाइड से पकाया हुए केले के छिलके पर सफेद धब्बा नजर आता है। इसके अलावा, केले का रंग भी ज्यादा चमकदार और आकर्षक रहता है। जबकि प्राकृतिक रूप से पकाए हुए केले की तो इसका रंग हल्का और नॉर्मल होता है। वहीं असली और नकली केले की पहचान पानी के सहारे भी कर सकते हैं। कार्बाइड से पका हुआ केला पानी में नहीं डूबता है। वह पानी में तैरता रहता है। जबकि प्राकृतिक रूप से पका हुआ केला पानी में आसानी से डूब जाता है। केमिकल युक्त केले की पहचान डंठल के सहारे भी कर सकते हैं। कार्बाइड से पके हुए केले का डंठल हरे रंग का होता है। जबकि प्राकृतिक तरीके से पके हुए केले का डंठल काला होता है।
नकली केला सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आप नकली केला का सेवन करते हैं, तो इससे पेट संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इतना ही नहीं नकली केले में कई तरह के केमिकल इस्तेमाल किए जाते हैं। यह त्वचा के लिए हानिकारक होता है। नकली केले से उल्टी की भी शिकायत हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।