Water-only fasting: सोशल मीडिया पर फिटनेस इन्फ्लुएंसर के पोस्ट स्क्रॉल करते समय आपने वाटर-ओनली फास्टिंग के फायदों के बारे में कई शानदार बातें सुनी होंगी। इससे तेजी से वजन कम होना और मानसिक तौर पर हेल्दी रहने से लेकर कई तरह के दावे किए जाते है। हालांकि नए रिसर्च के माध्यम से एक्सपर्ट्स ने इस बात की चेतावनी दी है कि इसके कई खतरनाक परिणाम हो सकते है।
वाटर ओनली फास्टिंग में पानी को छोड़कर सभी भोजन और पेय पदार्थों से परहेज करना शामिल होता है। यह आमतौर पर 1 से 3 दिनों के लिए किया जाता है। इसकी पॉपुलैरिटी तेजी से वजन घटाने के तरीकों की तलाश करने वालों के बीच खूब बढ़ी है, लेकिन हेल्थ विशेषज्ञों ने इसे लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। साइंस अलर्ट और एओएल में दिए गए एक अध्ययन के अनुसार, इसे लेकर एक प्रयोग किया गया। जिसमें शामिल प्रतिभागियों का वजन तो कम हुआ लेकिन इस फास्टिंग ने कई चिंताजनक शारीरिक प्रतिक्रियाओं को भी ट्रिगर किया।
पुरानी बीमारियों को कर सकता है ट्रिगर
इस एक्सपेरिमेंट में शामिल लोगों ने बनाता कि इसके अल्पकालिक दुष्प्रभावों में सिरदर्द, लो ब्लड प्रेशर और नींद न आना शामिल थे। लेकिन प्रतिभागियों के ब्लड टेस्ट में जो पाया गया उसने और भी चिंताजनक संकेत दिए। अध्ययन में सूजन से जुड़े प्रोटीन, जैसे कि सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी) और इंटरल्यूकिन-8 (आईएल-8) में आश्चर्यजनक वृद्धि देखी गई, जिससे पता चलता है कि शरीर की इम्यून सिस्टम को आराम देने के बजाय, वाटर फास्टिंग वास्तव में इसे ट्रिगर कर सकती है।
यह महत्वपूर्ण है क्योंकि सूजन कई पुरानी बीमारियों जैसे हृदय रोग और ऑटोइम्यून के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शोधकर्ताओं ने कहा, 'जबकि लंबे समय तक उपवास के दौरान तीव्र सूजन प्रतिक्रिया एक क्षणिक अनुकूलन तंत्र के रूप में काम कर सकती है, यह संभावित कार्डियोमेटाबोलिक प्रभावों के संबंध में चिंताएं बढ़ाती है जो दोबारा भोजन शुरू करने के बाद भी बनी रह सकती हैं।'
मांसपेशियों में समस्या और याददाश्त खोने का जोखिम
सूजन के अलावा शोधकर्ताओं ने मांसपेशियों और हड्डियों को जोड़ने वाले प्रोटीन में भी कमी पाई। इससे लंबी अवधि में मांसपेशियों में समस्या होने का खतरा बना रहता है। टेस्ट में चिंताजनक रूप से एमाइलॉयड बीटा जो प्रोटीन अल्जाइमर रोग से जुड़ा होता है उसका स्तर भी गिर गया जिससे याददाश्त संबंधी जोखिम हो सकता है। इस एक्सपेरिमेंट से आए नतीजों ने लोगों कि चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी प्रकार का लंबे समय तक उपवास केवल चिकित्सा पर्यवेक्षण के तहत ही किया जाना चाहिए।