सॉफ्ट ड्रिंक का चलन भारत में तेजी से बढ़ रहा है। इसे लेकर अब ब्रोकरेज फर्म जीरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर और सीईओ नितिन कामत ने चिंता जताई है। उन्होंने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (पूर्व नाम Twitter) पर भारत में सॉफ्ट ड्रिंक की बढ़ती खपत पर चिंता जताई। उन्होंने इसे लेकर एक बेवरेज कंपनी की हालिया कारोबारी नतीजे का हवाला दिया लेकिन उन्होंने किसी कंपनी का नाम नहीं लिया। उन्होंने लिखा है कि भारत में अब सॉफ्ट ड्रिंक्स की खपत रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई है जिसके तलके भापत अब वैश्विक स्तर की महामारी मधुमेह यानी डायबिटीज के केंद्र में आ गया है। वह पहले भी डायबिटीज को लेकर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने नवंबर 2023 में एक पोस्ट में लिखा था कि डायबिटीज भारत के लिए एक टाइम बम की तरह है।
क्या है Zerodha के सीईओ की चिंता?
नितिन कामत के मुताबिक सबसे डरावनी बात ये है कि यह युवाओं को तेजी से प्रभावित कर रहा है। शहर में रह रही 20 साल की महिला के अपने जीवनकाल में डायबिटीज होने की 64.6% संभावना है। पुरुषों के मामले में इसकी संभावना कम है लेकिन नगण्य नहीं क्योंकि संभावना 55.5% है। नितिन कामत के मुताबिक सबसे दुख की बात ये है कि लोगों में इसके बारे में जागरूकता की कमी है। डायबिटीज से पीड़ित करीब 27.5% लोगों को यह भी नहीं पता कि वे इससे प्रभावित हैं और अगर वे जानते भी हैं, तो बहुत कम लोग इलाज कराते हैं। यह संकट और भी गंभीर तब बन जाता है, जब आंकड़ों के मुताबिक 20 फीसदी से भी कम के पास हेल्थ इंश्योरेंस है यानी कि इलाज के लिए अधिकतर लोगों को अपनी जेब से खर्च करना होता जो गरीबों और कम आय वाले परिवारों के लिए भारी बोझ हो जाता है।
एक समय था, जब यह सिर्फ अमीर लोगों की बीमारी थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। उन्होंने लिखा है कि हालिया स्टडी के मुताबिक करीब 21 करोड़ भारतीयों को डायबिटीज है। उन्होंने पोल शुरू किया कि क्या आपको लगता है कि सॉफ्ट ड्रिंक की बढ़ती खपत भारत में स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा रिस्क है या ऐसा नहीं है।
इस संकट से निपटने के उपाय
नितिन कामत ने डायबिटीज से निपटने के कुछ उपाय सुझाए हैं। हालांकि उनका कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए कोई जादुई गोली नहीं है। इस निपटने के लिए लोगों के बीच जागरूकता फैलाने, गरीबों और कमजोर लोगों के लिए इंश्योरेंस कवरेज से लेकर डायबिटीज की शुरुआती अवस्था में ही पहचानने का रास्ता अपनाना होगा। हर दिन कुछ अतिरिक्त मिनट व्यायाम करना या बैठने का समय कम करना जैसे जीवनशैली में सरल बदलाव से बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं। यहां तक कि छोटे-छोटे बदलाव, जैसे कि दिन में पांच मिनट अतिरिक्त पैदल चलना या साइकिल चलाना इसके खतरे को कम कर सकते हैं। जीरोधा के सीईओ का कहना है कि भारतीयों को स्वस्थ रखने वाले फाउंडर्स और स्टार्टअप्स का वह सहयोग कर रहे हैं लेकिन इसमें इंडिविजुअल्स से लेकर सरकार तक को काम करने की जरूरत है।