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इस समस्या का गढ़ बन रहा भारत, जीरोधा के सीईओ नितिन कामत ने फिर उठाई आवाज

जीरोधा के सीईओ नितिन कामत ने चिंता जताई है कि भारत एक बड़ी समस्या के वैश्विक केंद्र में है। इसे लेकर उन्होंने एक पोल भी शुरू किया। जीरोधा के सीईओ ने दूसरी बार इस समस्या को लेकर बोला है और कहा कि वह इसे लेकर काम करने वाले स्टार्टअप्स और फाउंडर्स का सहयोग कर रहे हैं लेकिन इसके लिए सरकार और इंडिविजुअल्स सभी को साथ आना होगा

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड May 16, 2025 पर 1:04 PM
इस समस्या का गढ़ बन रहा भारत, जीरोधा के सीईओ नितिन कामत ने फिर उठाई आवाज
जीरोधा के सीईओ नितिन कामत के मुताबिक सबसे डरावनी बात ये है कि डायबिटीज युवाओं को तेजी से प्रभावित कर रहा है। शहर में रह रही 20 साल की महिला के अपने जीवनकाल में डायबिटीज होने की 64.6% संभावना है। पुरुषों के मामले में इसकी संभावना कम है लेकिन नगण्य नहीं क्योंकि संभावना 55.5% है।

सॉफ्ट ड्रिंक का चलन भारत में तेजी से बढ़ रहा है। इसे लेकर अब ब्रोकरेज फर्म जीरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर और सीईओ नितिन कामत ने चिंता जताई है। उन्होंने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (पूर्व नाम Twitter) पर भारत में सॉफ्ट ड्रिंक की बढ़ती खपत पर चिंता जताई। उन्होंने इसे लेकर एक बेवरेज कंपनी की हालिया कारोबारी नतीजे का हवाला दिया लेकिन उन्होंने किसी कंपनी का नाम नहीं लिया। उन्होंने लिखा है कि भारत में अब सॉफ्ट ड्रिंक्स की खपत रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई है जिसके तलके भापत अब वैश्विक स्तर की महामारी मधुमेह यानी डायबिटीज के केंद्र में आ गया है। वह पहले भी डायबिटीज को लेकर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने नवंबर 2023 में एक पोस्ट में लिखा था कि डायबिटीज भारत के लिए एक टाइम बम की तरह है।

क्या है Zerodha के सीईओ की चिंता?

नितिन कामत के मुताबिक सबसे डरावनी बात ये है कि यह युवाओं को तेजी से प्रभावित कर रहा है। शहर में रह रही 20 साल की महिला के अपने जीवनकाल में डायबिटीज होने की 64.6% संभावना है। पुरुषों के मामले में इसकी संभावना कम है लेकिन नगण्य नहीं क्योंकि संभावना 55.5% है। नितिन कामत के मुताबिक सबसे दुख की बात ये है कि लोगों में इसके बारे में जागरूकता की कमी है। डायबिटीज से पीड़ित करीब 27.5% लोगों को यह भी नहीं पता कि वे इससे प्रभावित हैं और अगर वे जानते भी हैं, तो बहुत कम लोग इलाज कराते हैं। यह संकट और भी गंभीर तब बन जाता है, जब आंकड़ों के मुताबिक 20 फीसदी से भी कम के पास हेल्थ इंश्योरेंस है यानी कि इलाज के लिए अधिकतर लोगों को अपनी जेब से खर्च करना होता जो गरीबों और कम आय वाले परिवारों के लिए भारी बोझ हो जाता है।

एक समय था, जब यह सिर्फ अमीर लोगों की बीमारी थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। उन्होंने लिखा है कि हालिया स्टडी के मुताबिक करीब 21 करोड़ भारतीयों को डायबिटीज है। उन्होंने पोल शुरू किया कि क्या आपको लगता है कि सॉफ्ट ड्रिंक की बढ़ती खपत भारत में स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा रिस्क है या ऐसा नहीं है।

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