'21वीं सदी भारत की सदी होगी', अपने कार्यकाल के आखिरी दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिया राष्ट्र के नाम संबोधन

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देशवासियों से भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण का आह्वान करते हुए को कहा कि प्रकृति मां गहरी पीड़ा से गुजर रही है और जलवायु संकट इस ग्रह के भविष्य को खतरे में डाल सकता है

अपडेटेड Jul 24, 2022 पर 10:17 PM
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अपने कार्यकाल के आखिरी दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिया राष्ट्र के नाम संबोधन

निवर्तमान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने रिटायरमेंट से पहले रविवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में अपने कार्यकाल के दौरान समाज के सभी वर्गों से मिले पूरे सहयोग, समर्थन और आशीर्वाद के लिए अपना हार्दिक आभार जताया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देशवासियों से भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण का आह्वान करते हुए को कहा कि प्रकृति मां गहरी पीड़ा से गुजर रही है और जलवायु संकट इस ग्रह के भविष्य को खतरे में डाल सकता है।

राष्ट्र के नाम अपने विदाई संबोधन में उन्होंने कहा कि देश 21वीं सदी को ‘भारत की सदी’ बनाने के लिए तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा, "शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाते हुए हमारे देशवासी सक्षम बन सकते हैं और आर्थिक सुधारों का लाभ लेकर अपने जीवन निर्माण के लिए सर्वोत्तम मार्ग अपना सकते हैं।"


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राष्ट्र के नाम राष्ट्रपति के रूप में टेलीविजन पर अपने अंतिम संबोधन में, कोविंद ने कहा, "महामारी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में और सुधार की जरूरतों को रेखांकित किया है। मुझे खुशी है कि सरकार ने इस काम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।"

उन्होंने कहा, "मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमारा देश 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के लिए तैयार हो रहा है।" उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ युवा भारतीयों के लिए अपनी विरासत से जुड़ने और 21वीं सदी में अपने पैर जमाने में बहुत सहायक सिद्ध होगी।

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उन्होंने पर्यावरण के लिए खतरे का विशेष उल्लेख किया और सभी नागरिकों से आने वाली पीढ़ियों के लिए इसका ध्यान रखने को कहा। कोविंद ने कहा, "प्रकृति मां गहरी पीड़ा से गुजर रही है और जलवायु संकट इस ग्रह के भविष्य को खतरे में डाल सकता है। हमें अपने बच्चों की खातिर अपने पर्यावरण, हमारी जमीन, हवा और पानी का ख्याल रखना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "अपनी दिनचर्या में तथा रोज़मर्रा की चीजों का इस्तेमाल करते समय हमें अपने पेड़ों, नदियों, समुद्रों और पहाड़ों के साथ-साथ अन्य सभी जीव-जंतुओं की रक्षा के लिए बहुत सावधान रहने की जरूरत है। प्रथम नागरिक के रूप में, अगर अपने देशवासियों को मुझे कोई एक सलाह देनी हो तो मैं यही सलाह दूंगा।"

उन्होंने कहा, "हमारा इतिहास, न केवल आधुनिक समय का बल्कि प्राचीनकाल से भी जो हमें याद दिलाता है कि वे वास्तविक हैं और उन्हें महसूस किया जा सकता है।"

राष्ट्रपति कोविंद का संबोधन प्रेरक था

उन्होंने कहा, "हमारे पूर्वजों और हमारे आधुनिक राष्ट्र के संस्थापकों ने कड़ी मेहनत और सेवा की भावना के साथ न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श का उदाहरण दिया। हमें केवल उनके नक्शेकदम पर चलना है और चलते रहना है।' कोविंद ने पूछा, "और आज एक आम नागरिक के लिए ऐसे आदर्शों के क्या मायने हैं?"

निवर्तमान राष्ट्रपति ने कहा, "मेरा मानना है कि मुख्य लक्ष्य उन्हें जीने का आनंद खोजने में मदद करना है। इसके लिए सबसे पहले उनकी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए।"

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के विदाई संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "राष्ट्रपति कोविंद का संबोधन प्रेरक था। उनकी टिप्पणी राष्ट्रीय प्रगति के प्रति उनके जुनून को प्रदर्शित करती है और उस भावना को दर्शाती है, जिसके साथ उन्होंने हमारे राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा की।"

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