Asad Ahmed Funeral: गैंगेस्टर अतीक अहमद (Atiq Ahmed) के बेटे असद अहमद (Asad Ahmed) को शनिवार को प्रयागराज के कसारी मसारी गांव में उसके दादा के बगल में दफनाया गया। असद की दो दिन पहले झांसी में यूपी एसटीएफ (STF) के साथ एक मुठभेड़ में मौत हो गई थी। अपने बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत लेने के लिए अतीक ने प्रयागराज की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हालांकि याचिका पर सुनवाई होने से पहले ही इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार असद को दफना दिया गया। असद के परिवार का कोई भी सदस्य उसके जनाजे में मौजूद नहीं था। ऐसे में नाना और फूफा (अतीक की बहन के पति) ने आखिरी रस्में को किया।
सूत्रों ने बताया कि असद के जनाजे में नहीं जा पाने के चलते अतीक अहमद "बेहद दुखी" है, और लॉकअप के अंदर एक बोरी पर लेटे हुए आंसू बहा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अतीक ने पुलिसकर्मियों से कहा, "मेरे बेटे के जनाजे में शामिल होना मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है। अल्लाह सबकुछ देख रहा है। वह किसी को भी माफ नहीं करेगा। तुम सब मेरे पूरे परिवार को बर्बाद करना चाहते हो।"
हमारे सहयोगी चैनल News18 ने एक दिन पहले बताया था कि अतीक अपने बेटे के आखिरी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अधिकारियों से गुहार लगा रहा था।
सूत्रों के मुताबिक, अतीक और उसके भाई अशरफ दोनों से पुलिस ने करीब 23 घंटे पूछताछ की। इस दौरान वह अपने परिवार के लिए रहम की गुहार लगाता रहा और बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत मांगता रहा। बेटे के गम में अतीक की तबियत भी बिगड़ गई, जिसके बाद रात करीब 10 बजे उसे हथकड़ी लगाकर प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल ले जाया गया।
सूत्रों ने बताया कि अतीक ने खाने से इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में उसने दाल-रोटी खाई और दवाएं ली। सूत्रों ने आगे कहा कि पूछताछ के दौरान, अतीक ने पाकिस्तान से हथियारों को मंगाने कबूल की और कहा कि वह किसी तरह जेल से ISIS एजेंट को कॉल करने में सफल रहा।
असद को पहले शुक्रवार को दफनाया जाना था। हालांकि, सुरक्षा कारणों और शव को सौंपने की जगह को लेकर रिश्तेदारों को कई बार नोटिस दिए जाने के कारण यह संभव नहीं हो सका। असद के शव को आखिरकार शनिवार को प्रयागराज लाया गया और सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया, जहां उसे उसके दादा के बगल में दफनाया गया।
सूत्रों ने कहा कि "भीड़ जमा होने" से बचने के लिए असद के शव को कसारी मसारी गांव में उसके पैतृक घर ले जाने की इजाजत नहीं दी गई।
असद के शव को जहां उसके ननिहाल की तरफ के रिश्तेदारों ने स्वीकार करने और इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। वहीं उसके साथ मुठभेड़ में मारे गए गुलाम के परिवार ने उसके शव को यह कहते हुए लेने से इनकार कर दिया है कि वे कानून का पालन करते हैं और एक अपराधी के शरीर को स्वीकार नहीं कर सकते।