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अटल भूजल योजना है देश के वॉटर मैनेजमेंट का सबसे बड़ा उदाहरण, समझें इसकी अहमियत

भारत ने वॉटर मैनेजमेंट के लिए इस समय एक बहुआयामी नजरिया अपनाया हुआ है, जिसमें भूजल पर विशेष जोर दिया गया है। भूजल पर जोर देने के पीछे अहम कारण यह है कि भारत दुनिया भर में इसका सबसे बड़ा यूजर्स है। देश की 62 प्रतिशत सिंचाई भूजल से ही होती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 85 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत पेयजल की सप्लाई भूजल से होता है

Moneycontrol Newsअपडेटेड Apr 10, 2024 पर 4:13 PM
अटल भूजल योजना है देश के वॉटर मैनेजमेंट का सबसे बड़ा उदाहरण, समझें इसकी अहमियत
केंद्र सरकार ने 2019 में अटल भूजल योजना को लॉन्च किया था

Atal Bhujal Yojana: गर्म होती दुनिया और बढ़ते जल संकट के बीच भारत का जल प्रबंधन (Water Management) करना लगातार अहम होता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के चलते हमारे जल संसाधनों पर असर पड़ रहा है, जिसके चलते बारिश के असमान पैटर्न से लेकर बाढ़ व सूखे और समुद्र के बढ़ते जल स्तर जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। भारत ने वॉटर मैनेजमेंट के लिए इस समय एक बहुआयामी नजरिया अपनाया हुआ है, जिसमें भूजल पर विशेष जोर दिया गया है। भूजल पर जोर देने के पीछे अहम कारण यह है कि भारत दुनिया भर में इसका सबसे बड़ा यूजर्स है। देश की 62 प्रतिशत सिंचाई भूजल से ही होती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 85 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत पेयजल की सप्लाई भूजल से होता है।

हालांकि इसके बावजूद भारत में भूजल का टिकाऊ तरीके से इस्तेमाल और मैनेजमेंट थोड़ा मुश्किल है क्योंकि इसकी निकासी की प्रक्रिया भूमि अधिकारों से जुड़ी हुआ है। जो जमीन का मालिक होता है, वहीं उस जमीन से पानी की निकासी कर सकता है। इसके चलत भूजल की अनियमित निकासी होती है। हालांकि केंद्र सरकार ने एक ऐसी योजना निकाली है, जो भूजल की निकासी को नियमित बनाने और लोगों तक इसके पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही है। इसका नाम अटल भूजल योजना (ABY) है।

काउंसिल ऑफ एनर्जी, एनवारयरमेंट एंड वॉटर (CEEW) ने हाल ही में एक स्टडी के जरिए बताया कि यह योजना राजस्थान में कैसे काम करती है। राजस्थान को इसलिए चुना गया क्योंकि जलवायु में काफी बदलाव और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण राज्य के कई इलाकों में जल संकट की स्थिति बढ़ गई है।

स्टडी के राजस्थान के 8 जिलों के 17 ग्राम पंचायतों का सर्वे किया गया। इन ग्राम पंचायतों के 'ग्रामीण जल और स्वच्छता समिति (VWSC)' के सदस्यों ने बताया कि बारिश की तीव्रता और अवधि में अनियमितता आई है और पिछले 20-30 सालों के दौरान भूजल के स्तर में काफी कमी आई है। इसके चलते सर्वे में शामिल 17 में 10 ग्राम पंचायतों में सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी में कमी आई।

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