Rice Export: बासमती और गैर-बासमती चावलों के एक्सपोर्ट पर बैन लगाने की सरकार की कोई योजना नहीं है। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने मंगलवार को केंद्र सरकार के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि भारत के पास चावल की पर्याप्त मात्रा में सप्लाई है और इसकी कीमतें भी नियंत्रण में है।
इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि गेहूं और शुगर के एक्सपोर्ट पर बैन लगाने के बाद सरकार अब चावल के एक्सपोर्ट पर भी बैन लगाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया था सरकार घरेलू बाजार में कीमतों को काबू में रखने के लिए एक तय सीमा से अधिक चावल के एक्सपोर्ट पर बैन लगाने पर विचार कर रही है।
अधिकारी ने बताया, "किसी भी तरह के चावल के एक्सपोर्ट को सीमित करने के कदम पर विचार नहीं हो रहा है। गोदानों में और यहां तक कि प्राइवेट ट्रेडर्स के रास भी पर्याप्त मात्रा में सप्लाई है। घरेलू कीमतें भी फिलहाल कंट्रोल में है।"
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है भारत
चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादन करने वाला देश है। अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022 के दौरान भारत ने 6.11 अरब डॉलर के गैर-बासमती चावल का एक्सपोर्ट किया था, जबकि इससे पहले वित्त वर्ष 2021 के दौरान यह आंकड़ा 4.8 अरब डॉलर का था। भारत ने वित्त वर्ष 2022 के दौरान 150 से अधिक देशों को गैर-बासमती चावल एक्सपोर्ट किया था।
गेहूं निर्यात से जुड़े नियमों में सरकार ने की सख्ती
केंद्र सरकार ने गेहूं निर्यात के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया। इस कदम का मकसद गलत और फर्जी दस्तावेजों के जरिए गड़बड़ी करने वाले व्यापारियों को गेहूं निर्यात करने से रोकना है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) को सूत्रों से जानकारी मिली थी कि कुछ एक्सपोर्टर, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी कराने को लेकर फर्जीवाड़ा कर पिछली तारीख के लेटर ऑफ क्रेडिट जमा कर रहे हैं, जिस पर 13 मई, 2022 या उसके पहले की तारीख है। सूत्रों से मिली जानकारी के बाद डीजीएफटी ने दिशानिर्देश जारी किया।
सरकार सिर्फ उन मामलों में गेहूं निर्यात की इजाजत दे रही है जिसके लिए 13 मई या उससे पहले लेटर ऑफर क्रेडिट (LOC) जारी किए गए थे। 13 मई को ही गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था।