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'केमिस्ट तय करेंगे मरीज को किस ब्रांड की दवा मिलेगी?' जेनेरिक प्रिस्क्रिप्शन नियम से नाराज हैं डॉक्टर

देश की शीर्ष मेडिकल संस्था, नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) के नए नोटिफिकेशन के अनुसार, डॉक्टरों को ब्रांडेड दवाएं लिखने से बचना चाहिए और ज्यादातर मामलों में जेनेरिक दवाएं लिखनी चाहिए। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि बार-बार उल्लंघन करने पर लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया जाएगा। इस कदम से मेडिकल जगत में चिंता पैदा हो गई है कि नोटिफिकेशन से ब्रांड चुनने की शक्ति केमिस्ट या फार्मेसी दुकानों के हाथों में चली जाएगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 15, 2023 पर 1:45 PM
'केमिस्ट तय करेंगे मरीज को किस ब्रांड की दवा मिलेगी?' जेनेरिक प्रिस्क्रिप्शन नियम से नाराज हैं डॉक्टर
'केमिस्ट तय करेंगे मरीज को किस ब्रांड की दवा मिलेगी?' जेनेरिक प्रिस्क्रिप्शन नियम से नाराज हैं डॉक्टर

भारत में इन दिनों डॉक्टर (Doctors) तब से काफी नाराज हैं, जब से उन्हें ब्रांडेड दवाओं के बजाय जेनेरिक दवाएं (Generic Medicines) लिखने के लिए कहा गया है। डॉक्टरों ने इस 'केमिस्ट राज को बढ़ावा देने वाला' फैसला बताया है। नाराज डॉक्टरों ने सलाह दी कि इससे बेहतर है कि 'ब्रांडेड दवाएं बनानी बंद कर देनी चाहिए।' देश की शीर्ष मेडिकल संस्था, नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) के नए नोटिफिकेशन के अनुसार, डॉक्टरों को ब्रांडेड दवाएं लिखने से बचना चाहिए और ज्यादातर मामलों में जेनेरिक दवाएं लिखनी चाहिए। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि बार-बार उल्लंघन करने पर लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया जाएगा।

NMC के इस नोटिफिकेशन का असल मतलब आप इस उदाहरण से भी समझ सकते हैं कि किसी भी डॉक्टर को मरीज के लिए अपने पर्चे पर 'क्रोसिन' ब्रांड न लिख कर केवल जनरल "पैरासिटामोल" लिखना चाहिए।

हालांकि, इस कदम से मेडिकल जगत में चिंता पैदा हो गई है कि नोटिफिकेशन से ब्रांड चुनने की शक्ति केमिस्ट या फार्मेसी दुकानों के हाथों में चली जाएगी।

उदाहरण के लिए, पेरासिटामोल 10 से ज्यादा सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांड और सैकड़ों जेनेरिक ब्रांड में उपलब्ध है। नए नियम के साथ, मरीज डॉक्टर के नुस्खे (दवा जेनेरिक नामों के साथ) के साथ फार्मेसी आउटलेट में जाएगा और केमिस्ट तय करेगा कि वे कौन सा ब्रांड बेचना चाहते हैं।

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