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पीएम मोदी के डिग्री मामले में इस कारण केजरीवाल पर लगा जुर्माना, गुजरात हाईकोर्ट ने रद्द किया सीआईसी का आदेश

गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पीएम मोदी के डिग्री मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट का कहना है कि गुजरात यूनिवर्सिटी ने पीएम मोदी के डिग्री सर्टिफिकेट्स को वर्ष 2016 से सार्वजनिक कर दिया है, इसके बावजूद केजरीवाल लगातार इसे दिखाने की मांग कर रहे हैं। इस वजह से हाईकोर्ट ने केजरीवाल पर यह जुर्माना लगाया है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Apr 01, 2023 पर 10:54 AM
पीएम मोदी के डिग्री मामले में इस कारण केजरीवाल पर लगा जुर्माना, गुजरात हाईकोर्ट ने रद्द किया सीआईसी का आदेश
हाईकोर्ट ने मुख्य सूचना आयोग (CIC) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सीआईसी ने PMO के जन सूचना अधिकारी (PIO), गुजरात यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी के पीआईओ को प्रधानमंत्री मोदी की बीए और एमए की डिग्री दिखाने का निर्देश दिया गया था।

गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पीएम मोदी के डिग्री मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट का कहना है कि गुजरात यूनिवर्सिटी ने पीएम मोदी के डिग्री सर्टिफिकेट्स को वर्ष 2016 से सार्वजनिक कर दिया है, इसके बावजूद केजरीवाल लगातार इसे दिखाने की मांग कर रहे हैं। इस वजह से हाईकोर्ट ने केजरीवाल पर यह जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने मुख्य सूचना आयोग (CIC) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सीआईसी ने PMO के जन सूचना अधिकारी (PIO), गुजरात यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी के पीआईओ को प्रधानमंत्री मोदी की बीए और एमए की डिग्री दिखाने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने यह फैसला गुजरात यूनिवर्सिटी की याचिका पर सुनाया है।

CIC के आदेश पर हाईकोर्ट ने क्यों लगाई रोक

सीआईसी ने पीएम मोदी की डिग्री को दिखाने का आदेश दिया था। हालांकि हाईकोर्ट कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI Act) का के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने जो वैधानिक व्यवस्था की है, उसके मुताबिक किसी शख्स की एडुकेशन डॉक्यूमेंट्स उसकी व्यक्तिगत जानकारियों के तहत आती है और ऐसे में इसे आरटीआई एक्ट के सेक्शन 8(1) से छूट मिली हुई। वहीं यूनिवर्सिटी और बोर्ड्स की बात करें तो उनके पास स्टूडेंट्स के बिहाफ पर यह जानकारी रहती है और उन्हें भी इसे एक्ट के तहत नहीं रखा गया है। ऐसे में यह मामला RTI Act के तहत बनता ही नहीं है।

इसके अलावा हाईकोर्ट ने पाया कि सीआईसी ने अपने आदेश में इस नतीजे पर पहुंची थी कि पीएम मोदी की डिग्री से संबंधित मांगी गई जानकारी न तो सार्वजनिक हित में थी और न ही प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के सार्वजनिक कार्यों की जवाबदेही या पारदर्शिता से जुड़ी हुई थी। इस कारण से हाईकोर्ट ने सीआईसी का फैसला रद्द कर दिया।

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