farmers income : कृषि वर्ष 2018-19 (जुलाई-जून) में भारत में किसान परिवारों की औसत आय महज 10,218 रुपये प्रति महीना थी। भले ही यह 2012-13 की तुलना में 60 फीसदी ज्यादा था, लेकिन सरकार के निष्कर्षों (हालिया सिचुएशन असेसमेंट सर्वे या एसएएस में शामिल) से इन छह साल के दौरान भारत के किसानों के लिए बढ़ते आय के संकट के संकेत मिलते हैं। किसान अब खेती से ज्यादा मजदूरी से ज्यादा कमा रहे हैं, जिससे खेती के अब कम आकर्षक होने के संकेत मिल रहे हैं। 2018-19 में लगभग हर दूसरा किसान परिवार कर्ज में था, लेकिन अब कर्ज का बोझ खासा बढ़ गया है। वहीं भारत में किसानों के एक बड़े हिस्से के पास काफी कम जमीन है। एवाई 2018-19 के मुताबिक, महज 0.2 फीसदी किसान परिवारों के पास 10 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन है।
ऐसे में क्या 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के आह्वान पर काम अभी भी जारी है। एवाई 2018-19 के बाद किसान परिवारों की औसत आय का कोई आंकड़ा नहीं है।
वित्त मंत्री ने बीते साल किए थे कई ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट, 2021-22 में सभी कमोडिटी की कॉस्ट की तुलना में 1.5 गुनी कीमत सुनिश्चित करने के लिए एमएसपी रेजीम का ऐलान किया था। इससे किसानों को होने वाला भुगतान खासा बढ़ गया। इसके अलावा रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के लिए अलोकेशन 30,000 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया। माइक्रो इरीगेशन फंड दोगुना करके 10,000 करोड़ रुपये कर दिया गया था।
किसानों की आय में 10.4% सीएजीआर ग्रोथ की जरूरत
एग्रीटेक स्टार्टअप नीम ट्री एग्रो सॉल्युशंस के को-फाउंडर धीरेश कहते हैं कि 2016 में अशोक दलवई कमेटी ने कहा था कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए 10.4 फीसदी की सीएजीआर ग्रोथ की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, “नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के हालिया एग्रीकल्चर सेंसस के मुताबिक, 0.01-1 हेक्टेयर खेत वाले किसानों के लिए एवरेज सीएजीआर 9.6 फीसदी रहा। और यह 10.4 फीसदी की आवश्यक ग्रोथ रेट के खासा करीब है।”
एग्री एक्सपर्ट- मिनिमम वेज से कम है आय
एग्री एक्सपर्ट देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि भले ही किसी को 2016 में भारतीय किसानों की औसत आय की कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का ऐलान कर दिया गया। उनके मुताबिक, उस साल का इकोनॉमिक सर्वे में उल्लेख था कि 17 राज्यों (लगभग आधा देश) के किसानों की औसत सालाना आय 20,000 रुपये थी। शर्मा कहते हैं, “इसका मतलब है कि यह 1,700 रुपये महीने से कम थी। यह एक गाय का पेट भरने के लिए भी काफी नहीं है तो एक किसान का परिवार इस पर कैसे जिंदा रहेगा?” 2018-19 के एसएएस के मुताबिक, कृषि प्लस गैर कृषि एक्टिविटीज से आय लगभग 10,218 रुपये प्रति महीने है। शर्मा कहते हैं, इसमें गैर कृषि एक्टिविटीज से होने वाली आय शामिल है और यह फिर भी एक चपरासी की कमाई से कम है। उन्होंने कहा कि सिर्फ कृषि से होने वाली आय 27 रुपये प्रति दिन है, जो मिनिमम वेज से काफी कम है।