RBI ने बैंकों के लिए 10 अगस्त को एक बड़ा ऐलान किया। केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि बैंकों को इंक्रिमेंटल 10 फीसदी कैश रिजर्व रेशियो (CRR) मेंटेन करना होगा। यह नियम 12 अगस्त से लागू हो जाएगा। केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी कम करने के लिए यह फैसला किया है। उसका मानना है कि 2,000 रुपये के करेंसी नोट के RBI के वापस ले लेने के बाद बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी जरूरत से ज्यादा हो गई है। केंद्रीय बैंक ने 19 मई को 2,000 रुपये के नोट को वापस लेने का ऐलान किया था। उसने कहा था कि जिन लोगों के पास 2000 रुपये के नोट हैं, वो इसे एक्सचेंज कर सकते हैं या अपने बैंक अकाउंट में डिपॉजिट कर सकते हैं। RBI ने 1 अगस्त को कहा था कि 31 जुलाई तक बैंकिंग सिस्टम में 3.14 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 2,000 रुपये के नोट वापस आ गए थे।
इंक्रिमेंटल कैश रिजर्व रेशियो को ICRR कहते हैं। इस उपाय का इस्तेमाल RBI तब करता है, जब बैंकिंग सिस्टम में डिपॉजिट अचानक बढ़ जाता है। बैंकिंग सिस्टम में डिपॉजिट (लिक्विडिटी) को सही स्तर पर लाने के लिए अतिरिक्त लिक्विडिटी को हटाना जरूरी होता है। शक्तिकांत दास ने कहा कि कीमतों में स्थिरिता और बैंकिंग सिस्टम में स्टैबिलिटी के लिए ICRR के जरिए अतिरिक्त लिक्विडिटी को हटाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसका असर इनफ्लेशन पर भी पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया कि यह उपाय अस्थायी यानी थोड़े समय के लिए है।
Bank of Baroda (BoB) को इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा, "इंक्रीमेंटल CRR के उपाय से बैंकों के पास मौजूद फंड घट जाएगा। इसका असर मार्केट रेट्स पर पड़ेगा। हालांकि, केंद्रीय बैंक का यह निर्देश अस्थायी है।" इस कदम के अस्थायी होने का मतलब यह है कि यह उपाय थोड़े समय के लिए है। जब RBI को लगेगा कि बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सही लेवल पर आ गया है तो वह इसे वापस ले लेगा।
Emkay Global की चीफ इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा कि ICRR से थोड़े समय के लिए लिक्विडिटी में हुई बढ़ोतरी को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस बारे में स्थिति थोड़ा स्पष्ट करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "अगर हम यह मान लें कि 10 फीसदी ICRR में मौजूदा 4.5 फीसदी का CRR शामिल होगा तो एचडीएफसी के एचडीएफसी बैंक में विलय के बाद लिक्विडिटी में 650/548 अरब रुपये की कमी आएगी।"