इस साल के यूनियन बजट 2022 (Union Budget 2022) को अब एक पखवाड़े से भी कम समय रह गया है और आज देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ( Finance Minister Nirmala Sitharaman) शाम 4.30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रही हैं। सामान्यतया बजट के पहले वित्त मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित नहीं की जाती है। इसलिए आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में देश और बाजार की उत्सुकता बढ़ गई है। लोगों को लग रहा है क्या बजट से पहले वित्त मंत्री किसी बड़े राहत पैकेज का ऐलान करने वाली हैं या फिर सरकार की तरफ से कुछ नीतिगत घोषणा हो सकती है।
सीएनबीसी-आवाज़ को एक्सक्लूसिव सूत्रों से जानकारी मिली है कि आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस को Budget 2022 से संबंधित किसी घोषणा से लेकर देखने की जरूरत नहीं है। सीएनबीसी-आवाज़ के लक्ष्मण रॉय ने सूत्रों के हवाले से कहा कि आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये जजमेंट को लेकर आयोजित की जा रही है जिसमें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने देवास मल्टीमीडिया (Devas Multimedia) के मामले में एनसीएलएटी (NCLAT) के फैसले को बरकरार रखा है।
बता दें कि अपने फैसले के तहत NCLAT ने Devas मल्टीमीडिया बंद करने को कहा है जिसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी और अब देश की सर्वोच्च अदालत ने भी एनसीएलएटी के फैसले पर मुहर लगा दी है। माना जा रहा है कि SC के फैसले से भारत का पक्ष मजबूत होगा और इतना ही नहीं इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन में भी भारत का पक्ष मजबूत होगा। सरकार द्वारा ये केस अपने पक्ष में आने पर वित्त मंत्री द्वारा आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करके देवास मल्टीमीडिया पर चर्चा की जा सकती है और प्रेस को ब्रीफ किया जा सकता है।
लक्ष्मण ने आगे कहा कि कल यानी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला एनसीएलएटी के पक्ष में आया जिससे भारत की इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन में चल रहे कई मामलों में स्थिति मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। ये मामला यूपीए सरकार के समय से चल रहा है और एनडीए सरकार बनने के बाद मामले में सख्ती दिखाई गई और सरकार ने अपनी रणनीति में बदलाव किया जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट से ये फैसला एनसीएलएटी के पक्ष में आया। इसलिए माना जा रहा है सरकार की रणनीति और पक्ष पर चर्चा करने के लिए वित्त मंत्री द्वारा ये प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई है।
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क्या है Devas मल्टीमीडिया मामला
देवास मल्टीमीडिया के बारे में अधिक जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के संपादक शैलेंद्र भटनागर ने कहा कि ये मामला सन 2005 का है भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation(ISRO) और देवास मल्टीमीडिया के बीच एक डील हुई थी जिसमें इसरो द्वारा देवास मल्टीमीडिया के लिए 2 सैटेलाइट लॉन्च किये जाने थे। ये सैटेलाइट टेलीकॉम सेक्टर के लिए लॉन्च किये जाने थे जो काफी कम फिक्वेंसी पर लॉन्च होने थे जिससे कंपनी को बहुत कम टॉवर लगाने की जरूरत पड़ती।
बता दें कि उन दिनों इसरो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन होने के नाते इस डील पर साल 2005 से लेकर 2010 तक काफी सवाल खड़े किये गये और बहुत बवाल मचा था और अंत में ये डील रद्द कर दी गई थी जिसके बाद देवास मल्टीमीडिया ने इसके बदले बहुत भारी मुआवजे की मांग की थी और एनसीएलएटी द्वारा उनके विरोध में फैसला किये जाने के बाद कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन वहां भी देवास मल्टीमीडिया को निराशा हाथ लगी है।