नीलामी में एमटीएनएल (MTNL) और बीएसएनएल (BSNL) की प्रॉपर्टीज को अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला है। दोनों कंपनियों की छह प्रॉपर्टीज को नीलामी के लिए पेश किया गया था। इनकी बिक्री से करीब 3,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी। मामले से जुड़े अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।
नीलामी के लिए पेश की गई प्रॉपर्टीज में बीएसएनएल के चार प्लॉट और रेजिडेंशियल फ्लैट्स शामिल थे। दो प्रॉपर्टीज एमटीएनएल की थी। अधिकारियों ने मनीकंट्रोल को बताया कि बीएसएनएल के लैंड एसेट्स को कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला।
रियल एस्टेट और वैल्यूएशन एक्सपर्ट्स ने बताया कि इसकी एक वजह यह हो सकती है कि टेलीकॉम कंपनियों की प्रॉपर्टीज के लिए जो रिजर्व प्राइस तय किया गया है, उसके मुकाबले लैंड प्राइसेज 50 से 80 फीसदी कम है। बिडिंग के आगे के राउंड में इनमें कमी की जा सकती है।
एक वैल्यूएशन एक्सपर्ट ने बताया कि अगर आगे के राउंड में भी इसी तरह का रिस्पॉन्स मिलता है तो सिर्फ यह विकल्प बचेगा कि कोई दूसरी सरकारी कंपनी अपने इस्तेमाल के लिए इन लैंड पार्सल को खरीद ले।
सरकार ने 2019 में रिवाइवल पैकेज का ऐलान किया था। एमटीएनएल और बीएसएनएल के एसेट्स बेचने की यह कोशिश उसी पैकेज का हिस्सा है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम को इन छह प्रॉपर्टीज की बिक्री से 3,000 करोड़ रुपये हासिल होने की उम्मीद थी।
डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के एसेट मॉनेटाइजेशन पोर्टल के जरिए यह बीएसएनएल और एमटीएनएल को नॉन-कोर एसेट की यह पहली नीलामी थी।
सरकार ने टाटा ग्रुप को एयर इंडिया बेचने के बाद से दूसरी सरकारी कंपनियों के खाली पड़ी जमीने और दूसरे एसेट्स की बिक्री की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसके लिए नेशनल लैंड मॉनेटाइजेशन कॉर्पोरेशन (NLMC) बनाई गई है।
एमटीएनएल, बीएसएनएल, भारत पेट्रोलियम, ब्रिज एंड रूफ कंपनी, बीईएमएल और एचएमटी से जुड़ी कुल 3,4000 एकड़ जमीन की पहचान बिक्री के लिए की गई है। एनएलएमसी इन जमीन की बिक्री प्रोसेस पर नजर रखेगी।