RBI का इंटरेस्ट रेट (Repo Rate) बढ़ाने का सिलसिला जल्द खत्म हो सकता है। कम से कम छह इकोनॉमिस्ट्स ने मनीकंट्रोल को यह बताया। दरअसल, आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के सदस्यों में इंटरेस्ट रेट वृद्धि को लेकर मतभेद बढ़ा है। सितंबर की एमपीसी की बैठक में इसके संकेत मिले थे।
पिछले महीने की एमपीसी की बैठक में ज्यादातर सदस्य इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए इंटरेस्ट रेट को लेकर आक्रामक रुख जारी रखना चाहते थे। लेकिन, एक्सटर्नल मेंबर्स Ashima Goyal और Jayanth Varma का कहना था कि इंटरेस्ट रेट को ज्यादा बढ़ाने से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। वर्मा ने यह भी कहा कि ऐसे वक्त पॉलिसी रेट को हाई रखना खतरनाक हो सकता है, जब इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर तस्वीर काफी धुंधली है।
इकोनॉमिस्ट्स ने कहा कि इनफ्लेशन से जुड़ी चिंता कम हो जाने के बाद एमपीसी अपना फोकस फाइनेंशियल 2023-24 में इकोनॉमिक ग्रोथ पर कर सकती है। एमपीसी अब तक इंटरेस्ट रेट में हुई वृद्धि के असर का आकलन भी कर सकती है।
DBS Bank की सीनियर इकोनॉमिस्ट्स Radhika Rao ने कहा, "अगर इनफ्लेशन हमारे अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में टारगेट रेंज में आ जाता है तो एमपीसी का फोकस ग्रोथ पर हो सकता है।" उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि पॉलिसमेकर्स रेट्स नहीं बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे ग्रोथ को बढ़ाने के लिए उपाय करने को तैयार हैं।
फिलहाल, MPC का फोकस इनफ्लेशन पर बना हुआ है। लगातार तीन तिमाहियों से यह एमपीसी की 2-6 फीसदी की टारगेट रेंज से बाहर बना हुआ है। इसे फ्लेक्सिबल इनफ्लेशन टारगेटिंग फ्रेमवर्क के तहत केंद्रीय बैंक की नाकामी माना जा रहा है। कानून के मुताबिक, अब RBI को इस बारे में केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजनी होगी। इसमें उसे इनफ्लेशन काबू में नहीं आने की वजहों के बारे में बताना होगा। उसे यह भी बताना होगा कि कब तक इनफ्लेशन काबू में आ जाएगा और इसे काबू में लाने के लिए क्या उपाए किए जा सकते हैं।
आरबीआई इस फाइनेंशियल ईयर में इनफ्लेशन 6.7 फीसदी पर आ जाने की उम्मीद जता चुका है। फिर अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसके 5 फीसदी पर आ जाने की उम्मीद है। यह आरबीआई की टारगेट रेंज के करीब होगा। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास का मानना है कि इनफ्लेशन के 4 फीसदी पर आने में दो साल का वक्त लग जाएगा।