Exclusive| 'भारत क्राफ्ट' पोर्टल के जरिये ई-रिटेल में कदम रखने का सरकार का पहला प्रयास फिलहाल स्थगित

भारत क्राफ्ट को GeM के विपरीत सभी निजी उपभोक्ताओं के खोला जाना था

अपडेटेड Jan 10, 2022 पर 7:39 PM
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ग्रामीण या आदिवासी उद्योगों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प और वस्त्र भारत क्राफ्ट पोर्टल पर बेचे जाने थे

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (micro, small and medium enterprises (MSME) मंत्रालय द्वारा मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में छोटे व्यवसायों, विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के लिए अपना सामान ऑनलाइन बेचने में मदद करने के लिए भारत क्राफ्ट पोर्टल (Bharat Craft portal) की योजना बनाई गई थी जिसे अभी के लिए स्थगित कर दिया गया है। मनीकंट्रोल को सूत्रों से ये जानकारी मिली है।

एक साल तक इस पर काम करने के बाद सरकार ने मार्च 2021 में पोर्टल को बनाने और संचालन करने के लिए प्राइवटे सेक्टर को आउटसोर्स करने का फैसला किया। लेकिन निजी कंपनियों की रुचि की कमी के कारण, प्रोजेक्ट को रोक दिया गया है, मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।

इस पोर्टल की घोषणा पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद अगस्त 2019 में नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) को सौंपे गये एमएसएमई मंत्रालय द्वारा की गई थी। इसे केंद्र के पब्लिक प्रोक्योरमेंट पोर्टल गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के मॉडल पर आधारित करने का प्रस्ताव था।


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हालांकि, केवल सरकारी खरीदारों के लिए सुलभ GeM के विपरीत भारत क्राफ्ट को सभी निजी उपभोक्ताओं के लिए खोलने की योजना बनाई गई थी और इसे सरकार द्वारा ई-रिटेल स्पेस में पहली बार कदम रखने के रूप में पेश किया गया था।

क्या रहे इसके आगे-पीछे के कारण (Back and forth)

बता दें कि वेबसाइट का उपयुक्त डिजिटल आर्किटेक्चर तैयार करने के बैकग्राउंड का काम भी अधूरा रह गया क्योंकि मंत्रालय को टेक्नोलॉजी पार्टनर्स को चुनने में एक चुनौती का सामना करना पड़ा। एक निजी टेक डेवलपर को चुनने की योजना के बाद लागत बाधाओं का सामना करना पड़ा जबकि मंत्रालय ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से संयुक्त रूप से पोर्टल को डिजाइन करने और चलाने के लिए संपर्क किया था।

इसके बाद एसबीआई ने घोषणा की कि वह ऑपरेशन के बैंकिंग का कामकाज करेगा। वहीं बैंक ने 10-15 करोड़ डॉलर निवेश करने के अपने इरादे भी स्पष्ट किए, लेकिन उसने अपनी कुछ शर्तें भी रखीं थी।

इसके प्रति दिखी कम रुचि (Lack of interest)

भारत क्राफ्ट पोर्टल को भी बड़े और बेहतर रूप से प्रचलित GeM पोर्टल की लोकप्रियता के कारण नुकसान हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि पोर्टल को GeM के साथ मर्ज करने का लंबे समय से प्रस्ताव था। लेकिन जिस कोड पर GeM बनाया गया है, उसकी विशेष प्रकृति के कारण यह संभव नहीं हो सका।

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पोर्टल के भविष्य को लेकर भ्रम ने निजी सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और वेबसाइट ऑपरेटरों को इससे दूर रखा। एक सूत्र ने कहा “कई लोगों ने महसूस किया कि भारत क्राफ्ट जैसे पोर्टल का कार्यभार संभालना असंभव है। जबकि उस समय ऐसी खबरें थीं कि GeM पोर्टल जल्द ही निजी संस्थाओं को थोक खरीदारी करने की अनुमति देगा। बाद में इसे छोटी-मोटी खरीदारी के लिए विस्तारित किया गया था। ”

नवंबर 2019 के अंत में इस आशय का एक कैबिनेट नोट भी जारी किया गया था। लेकिन GeM चलाने वाले वाणिज्य विभाग ने अंततः प्रस्ताव के खिलाफ ही फैसला किया।

देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में एमएसएमई क्षेत्र (MSME sector) की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत है और इसने लगभग 11 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है। अधिकारियों ने कहा कि सरकार वर्तमान में GDP में हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने और आने वाले पांच वर्षों में 15 करोड़ लोगों को रोजगार देने पर विचार कर रही है। नतीजतन इसके आगे बाद में पोर्टल में आधिकारिक रुचि दिखाई दे सकती है।

 

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