Explainer: RBI की Monetary Policy गुरुवार को आएगी, यहां जानिए अपने हर सवाल का जवाब

आरबीआई हर दो महीने पर अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को रिव्यू करता है। यह मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू इस वित्त वर्ष का अंतिम होगा

अपडेटेड Feb 09, 2022 पर 11:21 AM
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आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी इस बार अपने रुख में बदलाव का ऐलान कर सकती है। वह मौद्रिक नीति को लेकर अपने एकोमोडेटिव स्टैंस (उदार रुख) को न्यूट्रल (तटस्थ) बनाने का ऐलान कर सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) गुरुवार (10 फरवरी) को आएगी। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक बुधवार (8 जनवरी) को शुरू हो गई है। तीन दिन की बैठक के बाद इसके नतीजें 10 फरवरी को आएंगे। आरबीआई के गवर्नर गुरुवार को इसके नतीजों के बारे में बताएंगे। आइए यहां इस मॉनेटरी पॉलिसी के बारे में आपके हर सवाल का जवाब जानते हैं।

इस बार मॉनेटरी पॉलिसी में क्या हो सकता है?

आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी इस बार अपने रुख में बदलाव का ऐलान कर सकती है। वह मौद्रिक नीति को लेकर अपने एकोमोडेटिव स्टैंस (उदार रुख) को न्यूट्रल (तटस्थ) बनाने का ऐलान कर सकती है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि एमपीसी रिवर्स रेपो रेट को बढ़ा सकती है।

क्या है रिवर्स रेपो रेट?


रिवर्स रेपो रेट वह रेट है जिस पर आरबीआई के पास जमा बैंकों के जमा पैसे पर इंट्रेस्ट मिलता है। यह इंट्रेस्ट आरबीआई देता है। दरअसल, ज्यादा फंड होने पर बैंक अपना अतिरिक्त पैसा आरबीआई के पास डिपॉजिट करते हैं, जिस पर उन्हें आरबीआई इंट्रेस्ट देता है। अभी रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी है।

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आरबीआई के रिवर्स रेपो रेट बढ़ाने पर क्या होगा?

रिवर्स रेपो रेट बढ़ने का ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला है। हां, यह इस बात का संकेत होगा कि आरबीई अब अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने जा रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा, "रिवर्स रेपो में वृद्धि का मतलब यह है कि यह पॉलिसी को सामान्य बनाने की दिशा में पहला स्टेप है। इससे बाजार यह मानेगा कि रेट में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। इससे यील्ड में उछाल दिख सकता है।"

मार्केट के लिए रिवर्स रेपो में वृद्धि का क्या मतलब है?

एनालिस्ट्स का कहना है कि इस कदम का मतलब ज्यादातर सांकेतिक है। दरअसल, आरबीआई पहले से ही वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) के जरिए सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी में कमी ला रहा है। इससे इफेक्टिव रेट रेपो रेट के करीब पहुंच गया है। फाइनेंशियल मार्केट्स रिवर्स रेपो रेट में वृद्धि को पहले ही डायजेस्ट कर चुका है।

'अकोमोडेटिव' और 'न्यूट्रल' स्टैंस के क्या मायने हैं?

अकोमोडेटिव स्टैंस का मतलब है कि निकट भविष्य में आरबीआई पॉलिसी रेट में कमी करने जा रहा है। बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए ऐसा किया जाता है। आम तौर पर जब एमपीसी का स्टैंस अकोमोडेटिव होता है तो पॉलिसी रेट में वृद्धि की उम्मीद नहीं की जाती है।

न्यूट्रल स्टैंस का मतलब है कि एमपीसी स्थिति के मुताबिक पॉलिसी रेट में कमी या वृद्धि कर सकता है। पिछले दो साल से आरबीआई की एमपीसी ने अकोमोडेटिव स्टैंस अपना रखा है। इसका मकसद कोरोना की मार से बेहाल इकोनॉमी की हेल्प करना था।

MPC अपना रुख बदलकर न्यूट्रल करती है तो क्या होगा?

इसका मतलब यह होगा कि आने वाले समय में पॉलिसी रेट में बढ़ोतरी या कमी हो सकती है। क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डीके जोशी ने कहा, "यह बहुत अहम ऐलान है। यह अभी या अप्रैल में हो सकता है।"

क्या रेपो रेट में वृद्धि की उम्मीद है?

एमपीसी कई बार कह चुकी है कि वह धीरे-धीरे ग्रोथ को बढ़ावा देना चाहती है। इसलिए वह अचानक अपनी पॉलिसी में बड़ा बदलाव करना नहीं चाहेगी। ऐसे में वह रेपो रेट बढ़ाने से पहले अपनी पॉलिसी को अकोमोडेटिव से न्यूट्रल बनाने का ऐलान करना चाहेगी। इसलिए इस बार रेपो रेट में वृद्धि की उम्मीद नहीं है।

रेपो रेट क्या है?

रेपो रेट वह रेट है जिस पर बैंक आरबीआई से लिए उधार पर उसे ब्याज चुकाते हैं। बैंक फंड की अपनी जरूरत पूरी करने के लिए छोटी अवधि के लिए आरबीआई से पैसे उधार लेते हैं।

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