अमेरिका में इनफ्लेशन (US Inflation) 40 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट (US Labour Department) ने जनवरी में खत्म 12 महीने के इनफ्लेशन के डेटा जारी कर दिए हैं। यह बढ़कर 7.5 फीसदी पर पहुंच गया है। 1982 के बाद से यह अमेरिका में इनफ्लेशन का सबसे ऊंचा स्तर है।
एक्सपर्ट्स को इनफ्लेशन में इतनी ज्यादा वृद्धि की उम्मीद नहीं थी। इसने जानकारों को भी चौंकाया है। अमेरिकी स्टॉक मार्केट्स पर इनफ्लेशन के आंकड़ों का असर पड़ा है। गुरुवार को अमेरिकी स्टॉक मार्केट्स में बड़ी गिरावट आई। शुक्रवार को इंडियन स्टॉक मार्केट्स पर भी इसका असर दिखा। सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा गिर गया। आखिर अमेरिका में इनफ्लेशन बढ़ने का असर इंडियन स्टॉक मार्केट पर क्यों पड़ रहा है? आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं।
अमेरिका में लोगों को महंगाई तेजी से बढ़ने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीते एक साल में गैसोलीन (पेट्रोल) की कीमतें 40 फीसदी बढ़ गई हैं। यूज्ड कार और ट्रकों की कीमत 41 फीसदी बढ़ी हैं। फर्नीचर की कीमत 14 फीसदी और वुमेन ड्रेसेज की कीमत 11 फीसदी बढ़ी हैं। कीमतों में वृद्धि ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है।
एक साल से लगातार बढ़ रहा है इन्फ्लेशन
फेडरल रिजर्व को अमेरिका में इनफ्लेशन इतना बढ़ जाने की उम्मीद नहीं थी। पिछले साल फरवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स सिर्फ 1.7 फीसदी था। फिर धीरे-धीरे इसमें वृद्धि जारी रही। मार्च में ह 2.7 फीसदी, अप्रैल में 4.2 फीसदी, मई में 4.9 फीसदी, जून में 5.3 फीसदी, अक्टूबर में 6.2 फीसदी, दिसंबर में 7.1 फीसदी और अब 7.5 फीसदी पहुंच गया है।
आखिर क्यों बढ़ा इनफ्लेशन?
साल 2020 में कोरोना की महामारी का सबसे ज्यादा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा। इसने इकोनॉमी को ध्वस्त कर दिया। लॉकडाउन के चलते आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई। दुकानें बंद हो गईं। लोग घरों में बंद हो गए। कंपनियों ने 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को नौकरी से निकाल दिया। इसके चलते इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बहुत ज्यादा घट गया।
महामारी जारी रहने के डर से कंपनियों ने नया इन्वेस्टमेंट नहीं किया। लेकिन, उम्मीद से पहले इकोनॉमी में रिकवरी शुरू हो गई। सरकार और फेडरल रिजर्व के लिक्विडिटी बढ़ाने के उपायों से इकोनॉमी को मदद मिली। वैक्सीनेशन के चलते लोगों का भरोसा बढ़ा। इससे डिमांड बढ़ने लगी। अचानक बढ़ी डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं बढ़ी। इससे इनफ्लेशन 40 साल के हाई पर चला गया है।
अमेरिका में इनफ्लेशन बढ़ने का असर शुक्रवार को भारतीय बाजार पर दिखा। इसकी खास वजहे हैं। दरअसल, दुनिया के किसी देश में इनफ्लेशन बहुत हाई होने पर उसका असर दूसरे देशों पर भी पड़ता है। खासकर जब बात अमेरिकी इकोनॉमी की हो तो फिर हाई इनफ्लेशन का असर भारत सहित दूसरे देशों पर पड़ना तय है। सबसे पहला, असर हायर इंपोर्टेड इनफ्लेशन के रूप में पड़ता है। इसका मतलब है कि हम अमेरिका से जिन चीजों का आयात करते हैं, उनके लिए अब हमें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। घरेलू बाजार में भी इनकी कीमतें ज्यादा होंगी। इसका सीधा असर घरेलू इनफ्लेशन पर पड़ेगा।
दूसरा, अमेरिका में इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिे फेडरल रिजर्व इंट्रेस्ट रेट तेजी से बढ़ाएगा। इससे अमेरिका में यील्ड बढ़ेगी। इससे विदेशी फंड उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका में इन्वेस्ट करना चाहेंगे। तीसरा, अमेरिकी में ब्याज दरें बढ़ने से भारतीय कंपनियों के लिए वहां पैसे जुटाना महंगा हो जाएगा। हालांकि, अभी इंडियन कंपनियां अमेरिका में बहुत ज्यादा पैसे नहीं जुटाती हैं।