IMF के टॉप इकोनॉमिस्ट ने कहा है कि ग्लोबल इकोनॉमी की स्थिति और खराब होने वाली है। Pierre-Olivier Gourinchas का कहना है कि इस साल इकोनॉमी को झटका लगने से वे घाव फिर से हरे हो जाएंगे, जो कोरोना की महामारी के बाद से भरने लगे थे।

IMF के टॉप इकोनॉमिस्ट ने कहा है कि ग्लोबल इकोनॉमी की स्थिति और खराब होने वाली है। Pierre-Olivier Gourinchas का कहना है कि इस साल इकोनॉमी को झटका लगने से वे घाव फिर से हरे हो जाएंगे, जो कोरोना की महामारी के बाद से भरने लगे थे।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोगों के लिए बुरा वक्त अभी आने वाला है। 2023 में मंदी जैसी स्थिति होगी। उन्होंने ये बातें एक आर्टिकल में लिखी है। यह आर्टिकल IMF World Economic Report का हिस्सा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट में आईएमएफ ने 2022 के लिए जीडीप ग्रोथ के अपने अनुमान को 3.2 फीसदी पर बनाए रखा है। लेकिन, उसने 2023 में ग्रोथ के अनुमान को 0.20 फीसदी घटाकर 2.7 फीसदी कर दिया है।
Gourinchas के मुताबिक, 2023 में इकोनॉमी में आने वाली सुस्ती का दायरा व्यापक होगा। ग्लोबल इकोनॉमी में 33 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले देशों की इकोनॉमी में 2022 या 2023 में गिरावट देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि करीब चार में से एक संभावना यह है कि अगले साल ग्लोबल ग्रोथ 2 फीसदी के ऐतिहासिक निचले स्तर से भी कम रह जाएगा।
IMF के अर्थशास्त्री ने कहा कि अगर रिस्क बढ़ता है तो ग्लोबल ग्रोथ 1 फीसदी तक गिर जाएगी। इससे 2023 में प्रति व्यक्ति आय स्थिर रहेगी। इसका असर 10 से 15 फीसदी तक हो सकता है। ग्लोबल इनफ्लेशन 2022 में 9.5 फीसदी के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है। उसके बाद 2024 में यह 4.1 फीसदी पर आ सकता है।
लगातार इनफ्लेशन हाई लेवल पर बने रहने से दुनियाभर के केंद्रीय बैंक ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त बनाया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व 2022 में अब तक इंटरेस्ट रेट 300 बेसिस प्वॉइंट्स बढ़ा चुका है। 100 बेसिस प्वॉइंट्स एक फीसदी के बराबर होता है।
CME के फेडवॉच टूल के मुताबिक, इस बात की 80 फीसदी से ज्यादा संभावना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अपनी अगली मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट में 0.75 फीसदी वृद्धि कर सकता है। मॉनेटरी पॉलिसी के लिए अगली बैठक 2 नवंबर को होने वाली है। इससे यह तय है कि 2022 के अंत तक अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़कर 4 फीसदी से ज्यादा हो जाएगा।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के लगातार इंटरेस्ट रेट बढ़ाने से डॉलर में जबर्दस्त मजूबती आई है। दुनिया की प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर का हाल बताने वाला डॉलर इंडेक्स 20 साल के हाई लेवल पर पहुंच गया है। इससे दुनिया के दूसरे देशों की करेंसी पर बहुत दबाव बन गया है। इंडियन रुपया भी इनमें शामिल है।
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