अप्रैल महीने में देश की खुदरा महंगाई ( Retail Inflation) अपने 18 महीने के उच्चतम स्तर पर रह सकती है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के एक पोल में यह बात सामने आई है। खुदरा महंगाई बढ़ने के पीछे मुख्य तौर पर फ्यूल और खाने-पीने की चीजों के दाम में बढ़ोतरी को वजह बताया गया है। इसके साथ ही यह लगातार चौथा महीना हो सकता है, जब खुदरा महंगाई RBI के 2 से 6 फीसदी के तय दायरे से ऊपर बनी रहेगी।
महंगाई में इस उछाल का पहले से ही अनुमान था। दरअसल हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के चलते कई महीनों तक फ्यूल के दाम नहीं बढ़े थे। बाद में मार्च के आखिरी हफ्ते और फिर अप्रैल में तेल कंपनियों ने तेजी से फ्यूल का दाम बढ़ाया। इसके अलावा रूस-यूक्रेन जंग के चलते ग्लोबल लेवर पर तेल और गैस की कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं।
खुदरा महंगाई को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के जरिए मापा जाता है। CPI में करीब आधा वेटेज खाने-पीने से जुड़ी वस्तुओं का है। मार्च महीने में फूड इंफ्लेशन कई महीनों के उच्चतम स्तर पर रहा था और सब्जियों व कुकिंग ऑयल की अधिक कीमतों के चलते अप्रैल में भी इसके ऊंचे स्तर पर बने रहने की उम्मीद है।
पोल में कहा गया है कि इन पहलुओं के चलते अप्रैल में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 7.5 फीसदी पर पहुंच सकती है। मार्च में खुदरा महंगाई 6.95 फीसदी रही थी। रॉयटर्स ने यह पोल 5 से 9 मई के बीच कराया था और इसने 45 अर्थशास्त्रिों ने भाग लिया था। अगर यह सरकारी आंकड़े से मेल खाता है तो अक्टूबर 2020 के बाद यह सबसे अधिक खुदरा महंगाई दर होगी।
सरकार अप्रैल के खुदरा महंगाई दर से जुड़े आंकड़े 12 मई को जारी करेगी। कैपिटल इकोनॉमिक्स के सीनियर इंडिया इकोनॉमिस्ट शिलन शाह ने बताया, "खाने-पीने से जुड़ी वस्तुओं और फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण CPI इंफ्लेशन में अप्रैल में भी ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है। हाल में फ्यूल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर अप्रैल में महसूस किया जाएगा। अगर कोर मुद्रास्फीति में भी बढ़ोतरी है तो हमें आश्चर्य नहीं होगा।"