भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) वित्त वर्ष 2022 की मार्च तिमाही में घटकर 13.4 अरब डॉलर पर आ गया, जो इसकी ठीक पिछली तिमाही (दिसंबर 2021 तिमाही) में 22.2 अरब डॉलर था। इस तरह जनवरी मार्च तिमाही में 8.1 अरब डॉलर का घाटा रहा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बुधवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी।
प्रतिशत के संदर्भ में बात करें तो, देश का करेंट अकाउंट डेफिसिट मार्च तिमाही में GDP का 1.5 फीसदी रहा जो इससे पहले दिसंबर तिमाही में GDP का 2.6 प्रतिशत था। RBI ने बताया, "जनवरी मार्च तिमाही में करेंट अकाउंट डेफिसिट घटने के मुख्य कारण व्यापार घाटे में कमी और प्राइमरी इनकम के खर्च में कमी रही।"
चालू खाता घाटा तब होता है जब किसी देश के कुल आयात का मूल्य, उसके कुल निर्यात के मूल्य से अधिक हो जाता है। व्यापार संतुलन इसी चालू खाता घाटा का एक हिस्सा होता है।
देश का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट मार्च तिमाही में घटकर 54.5 अरब डॉलर रहा, जो इसकी ठीक पिछली तिमाही में 59.8 अरब डॉलर था। करेंट अकाउंट डेफिसिट को कम करने में इससे सबसे अधिक मदद मिली। वहीं सर्विस के मोर्च पर भारत का ट्रेड सरप्लस थोड़ा बढ़कर 28.3 अरब डॉलर रहा, जो इससे पहले दिसंबर तिमाही में 27.8 अरब डॉलर था।
इसके अलावा चालू खाता घाटा को कम करने में प्राइमरी इनकम के खर्च में कमी भी एक बड़ी वजह रही, जो मार्च तिमाही में घटकर 8.4 बिलियन डॉलर था। वहीं इससे पहले अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में यह खर्च 11.5 बिलियन डॉलर का था।
FY22 में 3 सालों के सर्वाधिक स्तर पर रहा घाटा
हालांकि अगर पूरे वित्त वर्ष 2022 की बात की जाए तो, देश का चालू खाता घाटा FY22 में 38.7 अरब डॉलर रहा, जो इसका पिछले 3 सालों का सर्वाधिक स्तर है। FY22 में चालू खाता घाटा बढ़ने के पीछे मुख्य वजह मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट का करीब दोगुना बढ़कर $189.5 अरब डॉलर पर पहुंचना रहा, जो वित्त वर्ष 2021 में 102.2 अरब डॉलर था।