महंगाई (Inflation) से जल्द राहत मिलने वाली है। इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में इनफ्लेशन में नरमी आने की उम्मीद है। यह महंगाई से बेहाल लोगों के लिए खुशखबरी है। महंगाई की वजह से लोगों का खर्च बढ़ गया है, जिसका सीधा असर उनकी बचत पर पड़ा है।

महंगाई (Inflation) से जल्द राहत मिलने वाली है। इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में इनफ्लेशन में नरमी आने की उम्मीद है। यह महंगाई से बेहाल लोगों के लिए खुशखबरी है। महंगाई की वजह से लोगों का खर्च बढ़ गया है, जिसका सीधा असर उनकी बचत पर पड़ा है।
रिटेल इनफ्लेशन (Retail Inflation) अप्रैल में 7.9 फीसदी पहुंच गया। यह मई 2014 के बाद सबसे ज्यादा है। रिटेल इनफ्लेशन पिछले चार महीनों से RBI के 6 फीसदी के टारगेट से ऊपर बना हुआ है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के संजीव प्रसाद ने कहा, "हमें डोमेस्टिक इनफ्लेशन के अगले कुछ महीनों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है। उसके बाद इसमें गिरावट आएगी। इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में हमें महंगाई से राहत मिल सकती है।"
क्रूड के प्राइस में नरमी आने की उम्मीद है। इसका औसत प्राइस 105 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है। इस साल मानसून भी सामान्य रहने की उम्मीद है। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि मई में रिटेल इनफ्लेशन मई में गिरकर 7 फीसदी पर आ सकता है। इनफ्लेशन के मई के आंकड़े 13 जून को आएंगे। इस साल अप्रैल में RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में रिटेल इनफ्लेशन 5.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।
RBI महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। पिछले महीने की शुरुआत में उसने अचानक रेपो रेट अचानक 0.40 फीसदी बढ़ा दिया। केंद्रीय बैंक ने कहा कि यूक्रेन क्राइसिस, कमोडिटी की कीमतों में उछाल और महंगे क्रूड की वजह से इनफ्लेशन पर दबाव रह सकता है।
सरकार ने लोगों को महंगाई से राहत देने के लिए कई कदम उठाएं हैं। उसने छह महीने में दूसरी बार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाया है। गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है। चीनी के निर्यात के लिए सीमा तय कर दी है। कुछ पाम तेलों के आयात पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाई गई है।
बार्कलेज का कहना है कि अगले हफ्ते RBI अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में इनफ्लेशन के अनुमान को बढ़ाकर 6.2-6.5 फीसदी कर सकता है। उसने कहा है कि आने वाले महीनों में इनफ्लेशन में कमी आने का अनुमान है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने इस फाइनेंशियल ईयर में औसत इनफ्लेशन 6.4 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है। यह मार्च 2023 तक घटकर 4.6 फीसदी पर आ सकता है।
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