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जानें क्या है पंचवर्षीय योजना, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को बदलने में निभाई बड़ी भूमिका

पंच वर्षीय योजनाओं के पीछे की सोच यह है कि इसमें भारत सरकार अपनी ओर से दस्तावेज तैयार करती है, जिसमें अगले 5 सालों के लिए उसकी आमदनी और खर्च की योजना होती है। केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों के बजट को दो भागों में बांटा गया है, गैर-योजना बजट और योजना बजट। गैर-योजना बजट सालाना आधार पर रोज के कामों के हिसाब से खर्च किया जाता है। वहीं योजना बजट को योजना द्वारा निर्धारित प्राथमिकताओं के आधार पर पांच सालों के दौरान खर्च किया जाता है। साल 1951 से 2017 तक भारतीय अर्थव्यवस्था का मॉडल पंचवर्षीय योजनाओं पर आधारित था

Curated By: Abhishek Nandanअपडेटेड Aug 08, 2023 पर 8:43 PM
जानें क्या है पंचवर्षीय योजना, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को बदलने में निभाई बड़ी भूमिका
पंच वर्षीय योजनाओं के पीछे की सोच यह है कि इसमें भारत सरकार अपनी ओर से दस्तावेज तैयार करती है, जिसमें अगले 5 सालों के लिए उसकी आमदनी और खर्च की योजना होती है

इस साल का 15 अगस्त यानी हमारा स्वतंत्रता दिवस कई मायनों में खास होने वाला है। यह हमारी आजादी का 76वां साल है। साल 1947 में ब्रिटिश हुकूमत से आजाद होने के बाद से ही इन 76 सालों में हमारे देश में कई बदलाव हुए हैं। इस दौरान हमारा देश आर्थिक मोर्चे पर भी काफी बदला है और मजबूत भी हुआ है। 1947 में आजाद होने के बाद जहां भारत की गिनती पिछड़े और गरीब देशों में की जा रही थी तो वहीं आज हम दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। भारत की इकोनॉमी दुनिया की सबसे तेज रफ्तार अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। साथ ही आज हम दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक हैं। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे कानूनों या मौकों के बारे में बताएंगे जिसने हमारी अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाला हो और इसे बदल कर रख दिया हो। जिनके बिना साल 2023 के भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में सोचना भी शायद बेमानी सा होगा।

क्या है पंचवर्षीय योजना

पंच वर्षीय योजनाओं के पीछे की सोच यह है कि इसमें भारत सरकार अपनी ओर से दस्तावेज तैयार करती है, जिसमें अगले 5 सालों के लिए उसकी आमदनी और खर्च की योजना होती है। केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों के बजट को दो भागों में बांटा गया है, गैर-योजना बजट और योजना बजट। गैर-योजना बजट सालाना आधार पर रोज के कामों के हिसाब से खर्च किया जाता है। वहीं योजना बजट को योजना द्वारा निर्धारित प्राथमिकताओं के आधार पर पांच सालों के दौरान खर्च किया जाता है। साल 1951 से 2017 तक भारतीय अर्थव्यवस्था का मॉडल पंचवर्षीय योजनाओं पर आधारित था। इसे सही तरह से लागू करने के लिए योजना आयोग नाम की एक संस्था भी बनाई गई थी। जिसकी जगह पर साल 2015 में एक नई संस्था नीति आयोग अस्तित्व में आई थी।

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पहली पंच वर्षीय योजना

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