आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी 7 जून को आने वाली है। सवाल है कि लोकसभा चुनावों के नतीजों का असर मॉनेटरी पॉलिसी पर पड़ेगा? एक्सपर्ट्स का कहना है कि चुनावी नतीजों का असर मॉनेटरी पॉलिसी पर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि यह पॉलिसी सिर्फ घरेलू स्थितियों से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति को भी ध्यान में रखकर तय की जाती है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की लीड इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा कि राजनीति के स्तर पर जो बदलाव आया है उससे आरबीआई का सीधा कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों की वजह से इकोनॉमी को लेकर आरबीआई की सोच में कोई बदलाव नहीं आएगा।
मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव की उम्मीद नहीं
Manappuram Finance के ग्रुप चीफ इकोनॉमिस्ट माधवनकुट्टी ने कहा कि सरकार और आरबीआई के बीच के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के मुताबिक, RBI को रिटेल इनफ्लेशन को 4 फीसदी पर लाना है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक का चुनावी नतीजों से कुछ लेनादेना नहीं है। आरबीआई की छह सदस्यों वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक दो दिन से चल रही है। इसके फैसले का ऐलान 7 जून को होगा। यह FY25 की दूसरी मॉनेटरी पॉलिसी है। केंद्रीय बैंक हर दो महीने पर एक बार मॉनेटरी पॉलिसी पेश करता है। ज्यादातर एक्सपर्ट्स का कहना है कि RBI इस बार मॉनेटरी पॉलिसी में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा।
सरकारी की पॉलिसी को लेकर कयास
लोकसभा चुनावों के नतीजों में बीजेपी को अपने दम पर सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिली हैं। इसका मतलब है कि सहयोगी दलों पर उसकी निर्भरता बढ़ेगी। ऐसे में नई सरकार की पॉलिसी को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। खासकर पूंजीगत खर्च और फिस्कल कंसॉलिडेशन को लेकर एक्सपर्ट्स की राय बंटी हुई है। कुछ जानकारों का कहना है कि पूंजीगत खर्च पर नई सरकार का भी फोकस बना रहेगा। लेकिन, कुछ का कहना है कि सरकार रेवेन्यू एक्सपेंडिचर पर फोकस बढ़ा सकती है।
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फिस्कल कंसॉलिडेशन पर फोकस बना रहेगा
ज्यादातर एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि फिस्कल कंसॉलिडेशन को लेकर सरकार की पॉलिसी में बदलाव नहीं आएगा। इसकी एक बड़ी वजह आरबीआई की तरफ से डिविडेंड के रूप में सरकार को मिला बड़ा अमाउंट है। FY24 में सरकार का फिस्कल डेफिसिट 16.54 लाख करोड़ रुपये रहा। यह तय टारगेट का 95.3 फीसदी है। यह तब है जब सरकार ने पूंजीगत खर्च काफी बढ़ाया है।