गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) अथॉरिटीज की 1.25 लाख कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच जारी रहने की उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि अथॉरिटीज टैक्स चोरी के मामलों पर अंकुश लगाना चाहती है। सरकार के एक सीनियर अधिकारीन ने 15 सितंबर को मनीकंट्रोल को इस बारे में बताया। ये जांच फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी हैं। ITC के तहत जीसीटी टैक्सपेयर्स को प्रोडक्शन में इस्तेमाल किए गए इनपुट्स (कच्चे माल) पर चुकाए गए टैक्स पर क्रेडिट क्लेम करने की इजाजत है। कई कंपनियां फर्जी इनवायसिंग के जरिए इसका गलत फायदा उठाने की कोशिश करती हैं। इसका मतलब यह है कि वे गुड्स और सर्विसेज की असल में सप्लाई नहीं होने के बावजूद वे फर्जी इनवायस के जरिए टैक्स पर क्रेडिट क्लेम करती हैं। इससे सरकार के रेवेन्यू को नुकसान होता है।
जीएसटी अथॉरिटीज ने स्पेशल अभियान के तहत फर्जी क्रेडिट का पता लगाया था। इससे 63,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू लॉस की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारी ने कहा, "रेवेन्यू डिपार्टमेंट अब फिर से मामलों की जांच कर रहा है। यह स्पेशल ड्राइव के तहत पहले चरण के बाद की जांच है। अब हमें यह चेक करना है कि किन्हें फर्जी ITC की सप्लाई की गई। लेवल 1 और लेवल 2 के फेक आईटीसी चेन की जांच की जा रही है।"
सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) ने पहले दो महीने का विशेष अभियान शुरू किया था। इसे 14 मई से 14 जुलाई के बीच अंजाम दिया गया। इसके तहत 77,200 एंटिटीज की जांच की गई। इनमें से 20,800 फर्जी पाए गए। अधिकारी ने बताया कि पहले 77,200 एंटिटीज की पहचान रिस्क के तौर पर की गई। उसके बाद 1.25 लाख एंटिटीज के खिलाफ आगे की जांच की गई। इन 1.25 लाख कंपनियों के खिलाफ जांच का यह दूसरा चरण है।
ये 1.25 लाख कंपनियां देशभर की हैं। इनमें से कुछ का वजूद नहीं भी हो सकता है या वे फर्जी हो सकती हैं। लेकिन, इनमें कई सरकारी एजेंसियां और प्रतिष्ठित कंपनियां भी हैं। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर बाद की जांच को अंजाम दे रही हैं। उदाहरण के लिए दिल्ली की एक फर्जी कंपनी ने मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों की पांच कंपनियों को सप्लाई किया है। अब संबंधित राज्यों की सरकारें पांचों कंपनियों के खिलाफ जांच कर रही हैं।