भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) में रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) में 0.25 फीसदी वृद्धि कर सकता है। केंद्रीय बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 7 फरवरी से 9 फरवरी तक चलेगी। आरबीआई हर दो महीने पर अपनी मौद्रिक पॉलिसी की समीक्षा करता है। अर्थव्यवस्था और सिस्टम में लिक्विडिटी की जरूरतों को देखते हुए आरबीआई रेपो और रिवर्स रेपो में बदलाव का फैसला लेता है।
ब्रिटिश ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज ने कहा है कि अगले हफ्ते अपनी मौद्रिक समीक्षा में आरबीआई रिवर्स रेपो रेट में 0.25 फीसदी इजाफा कर सकता है। उसने कहा है कि केंद्रीय बैंक इस बार रेपो रेट में बदलाव नहीं करेगा। आरबीआई बैंको को जो कर्ज देता है, उस पर रेपो रेट से इंट्रेस्ट लेता है। इसके उलट जब वह बैंकों से अतिरिक्त डिपॉजिट एक्सेप्ट करता है तो उस पर रिवर्स रेपो रेट पर बैंकों को इंट्रेस्ट देता है।
बार्कलेज के एनालिस्ट्स ने कहा, "ओमीक्रॉन के चलते ग्रोथ से जुड़ी चिंता और इनफ्लेशन की मौजूदा दर को देखते हुए केंद्रीय बैंक के पास अपनी मौद्रिक नीति को ग्रोथ ओरिएंटेड बनाए रखने की पर्याप्त गुंजाइश है।" ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि लिक्विडिटी मैनेजमेंट एक्शन के तहत केंद्रीय बैंक रिवर्स रेपो रेट में 0.20 से 0.25 फीसदी वृद्धि कर सकता है। बैंकिंग से जुड़े मामलों की जानकारी रखने वाले कुछ और लोगों ने भी रिवर्स रेपो रेट में वृद्धि का अनुमान जताया है।
बार्कलेज ने कहा है कि मंगलवार को पेश बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर पर सरकार का फोकस है। इससे ज्यादा रोजकोषीय घाटे से गुजर रही अर्थव्यवस्था को सपोर्ट मिलेगा। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बारे में ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि इसका असर फ्यूल की घरेलू कीमतों पर पड़ता है। लेकिन मार्च में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव पूरा होने से पहले ईंधन की घरेलू कीमतों में वृद्धि की उम्मीद नहीं है।
उधर, अमेरिका में ब्याज दरें बढ़नी जा रही हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने कहा है कि वह ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी करेगा। माना जा रहा है कि पहली बढ़ोतरी मार्च में हो सकती है। इस साल कम से कम 5 बार बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। दरअसल, अमेरिका में इनफ्लेशन 7 फीसदी पर पहुंच गया है, जो 40 साल का उच्चतम स्तर है। इधर, इंडिया में रिटेल इनफ्लेशन अभी भी आरबीआई के तय दायरे में है। इसलिए इंडिया में ब्याज दरें फिलहाल बढ़ने की उम्मीद नहीं है।