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क्या 35% GST स्लैब विकास में बनेगी बाधा? सिगरेट, तंबाकू हो सकते हैं महंगे, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जीएसटी रेट्स रैशनलाईज़ेशन पर ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम) ने हाल ही में 35% के एक नए जीएसटी स्लैब का सुझाव दिया है। यह नया स्लैब मौजूदा 4 स्लैब्स के अलावा होगा, जो डिमेरिट गुड्स पर लगाया जाएगा, जिनमें कोल्ड ड्रिक्स, सिगरेट और तम्बाकू आते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 19, 2024 पर 6:35 PM
क्या 35% GST स्लैब विकास में बनेगी बाधा? सिगरेट, तंबाकू हो सकते हैं महंगे, जानिए एक्सपर्ट्स की राय
सरकार ने 2017 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लाकर टैक्स सुधार की शुरुआत की।

सरकार ने 2017 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लाकर टैक्स सुधार की शुरुआत की। GST का उद्देश्य टैक्स संरचना को सरल बनाना और टैक्स का बोझ कम करना था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में कुल जीएसटी कलेक्शन 9% बढ़कर 1.87 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का दूसरा सबसे बड़ा जीएसटी कलेक्शन है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जीएसटी रेट्स रैशनलाईज़ेशन पर ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम) ने हाल ही में 35% के एक नए जीएसटी स्लैब का सुझाव दिया है। यह नया स्लैब मौजूदा 4 स्लैब्स के अलावा होगा, जो डिमेरिट गुड्स पर लगाया जाएगा, जिनमें कोल्ड ड्रिक्स, सिगरेट और तम्बाकू आते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे विकास में बाधा हो सकती है और कारोबार के साथ ही शेयर बाजार पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

35% GST स्लैब पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

लॉ फर्म एश्लर लॉ में पार्टनर पिंगल खान का कहना है कि जीओएम के ये सुझाव भ्रामक हैं क्योंकि जीएसटी का उद्देश्य टैक्स का रैशनलाईज़ेशन होता है। देशों में यह रुझान देखा गया है कि सिन प्रोडक्ट्स (ऐसे प्रोडक्ट, जिनकी लोगों को लत लग जाती है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं ) पर टैक्स दो कारणों से लगाया जाता है। पहला कारण है, रेवेन्यू कलेक्शन बढ़ाना, क्योंकि इन उत्पादों की लागत से इनकी मांग प्रभावित नहीं होती यानी कीमतें बढ़ने से इनकी खपत में अंतर नहीं आता। दूसरा कारण है, टैक्स लगाकर उन्हें महंगा बनाना ताकि ग्राहक उनकी बजाय सुरक्षित विकल्पों को अपनाने लगें। लेकिन यहां पर एक बात गौर करने लायक है कि जीएसटी वाले ज़्यादातर देशों में स्लैब्स और टैक्स दरें काफ़ी कम होती हैं।

पिंगल खान का कहना है कि विश्व बैंक के एक अध्ययन के अनुसार, 2023 में भारत में कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक (सीएसडीएस) पर लगाया जाने वाला 40% का टैक्स सबसे अधिक टैक्स दरों में से एक था। इंग्लैंड और फ्रांस जैसे देशों में ज़्यादा शुगर वाले उत्पादों पर ज़्यादा टैक्स लगता है, और कम शुगर वाले उत्पादों पर कम टैक्स लगता है। ग्राहक अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कम शुगर वाले उत्पादों की ओर जा रहे हैं, जिससे कम शुगर वाले पेय का नया बाज़ार विकसित हो रहा है। लेकिन शुगर वाले हर पेय पर एक सा टैक्स लगाने से उत्पादक कम शुगर वाले उत्पाद बनाने के लिए इन्वेस्टमेंट और इनोवेशन नहीं करेंगे। इसलिए टैक्स संरचना में परिवर्तन से ये उत्पादक कम शुगर वाले उत्पाद बनाने की ओर प्रेरित होंगे। इससे नई नौकरियां पैदा होंगी और सरकार को ज़्यादा रेवेन्यू मिलेगा। इससे इनोवेशन भी बढ़ेगा और लोगों का स्वास्थ्य भी सुरक्षित होगा।

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